नरेंद्र मोदी और अभिजीत दीपके  (सोर्स: सोशल मीडिया)
औरंगाबाद

80 साल के बुजुर्गों के संवाद से Gen Z को क्या मिलेगा? अभिजीत दीपके का पीएम मोदी और मोहन भागवत पर तीखा तंज

Abhijit Dipke Bhagwat, GenZ Dialogue: युवाओं की राजनीति और मोहन भागवत के Gen Z संवाद पर CJP संस्थापक अभिजीत दीपके का पीएम मोदी और संघ प्रमुख पर तीखा हमला। जानिए उन्होंने युवा प्रतिनिधित्व पर क्या कहा।

गोरक्ष पोफली

Abhijit Dipke Slams PM Modi And Mohan Bhagwat: महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बार फिर सत्ताधारी गठबंधन और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर बड़ा हमला बोला है। दीपके ने दावा किया है कि देश के युवाओं की बढ़ती ताकत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संघ प्रमुख मोहन भागवत को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता कल तक युवाओं को गंभीरता से नहीं लेते थे, आज उन्हें सोशल मीडिया और संवाद का सहारा लेना पड़ रहा है।

रात के 1:00 बजे रील डाल रहे हैं प्रधानमंत्री

छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से बात करते हुए दीपके ने कहा कि यह बदलाव किसी शौक से नहीं, बल्कि मजबूरी में आया है। उन्होंने कहा, यह तो बिल्कुल इस देश के युवाओं ने फोर्स किया है। आज स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी रात के 11 से 1 बजे के बीच इंस्टाग्राम पर जाकर रील डालनी पड़ रही है। दीपके के अनुसार, यह युवाओं की उस ताकत का परिणाम है जिसे अब कोई भी राजनीतिक दल नजरअंदाज नहीं कर सकता।

मोहन भागवत और Gen Z संवाद पर सवाल

6 अगस्त को मुंबई में होने वाले सरसंघचालक मोहन भागवत के Gen Z के साथ संवाद कार्यक्रम पर भी दीपके ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अब मोहन भागवत का भी Gen Z से बात करने का मन कर रहा है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि देर से ही सही, लेकिन इन बड़े नेताओं को अब यह समझ में आ गया है कि वे Gen Z को इग्नोर या डिसमिस नहीं कर सकते।

पुराने चेहरों के बजाय युवा प्रतिनिधित्व की मांग

दीपके ने इस संवाद की सार्थकता पर बड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर पूछा कि 70 से 80 साल के लोग युवाओं से बात करके आखिर क्या हासिल करेंगे? उनके अनुसार, केवल बातचीत करना काफी नहीं है। दीपके ने तर्क दिया, आप बात करना चाहते हैं, यह अच्छी बात है, लेकिन उससे Gen Z को क्या मिलेगा? इस पीढ़ी को जो चाहिए, वह है यंग रिप्रेजेंटेशन।

उन्होंने संघ और भाजपा को सलाह दी कि वे केवल संवाद का ढोंग न करें, बल्कि अपने संगठन और नेतृत्व में युवा चेहरों को आगे लाएं। दीपके ने जोर देकर कहा कि अगर Gen Z के चेहरे सामने होंगे, तो वह युवाओं के लिए ज्यादा बेहतर होगा।

बदलती राजनीति का संकेत

अभिजीत दीपके का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। उनके इस तंज ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई बुजुर्ग नेतृत्व वाली संस्थाएं आज के आधुनिक और तकनीक-प्रेमी युवाओं की आकांक्षाओं को समझ पा रही हैं या यह केवल चुनावी राजनीति का एक हिस्सा है। दीपके के इस हमले ने न केवल RSS बल्कि भाजपा के डिजिटल प्रचार तंत्र को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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