वृक्षारोपण की प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया) 
अमरावती

ग्लोबल वार्मिंग के बीच वृक्षमित्र की हुंकार, एक व्यक्ति, एक पेड़ का संकल्प ही बचाएगा धरती का अस्तित्व

Vrukshamitra Sanstha: वृक्षमित्र सामाजिक संगठन के अध्यक्ष दिनेश गावंडे ने पर्यावरण संकट पर जताई चिंता। 'एक व्यक्ति एक पेड़' के संकल्प और अवैध पेड़ कटाई पर रोक लगाने की मांग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

महाराष्ट्र डेस्क

Appeal For Tree Plantation: वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर बढ़ता तापमान, बदलता मौसम और प्रकृति का बिगड़ता संतुलन मानव जाति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है। कंक्रीट के जंगलों के विस्तार और विकास की अंधी दौड़ में हमने उन फेफड़ों को काट दिया है जो हमें जीवन देते हैं। इसी गंभीर विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए वृक्षमित्र सामाजिक संगठन के संस्थापक अध्यक्ष और आर्किटेक्ट इंजीनियर दिनेश गावंडे ने समाज को आगाह किया है कि यदि हम अब भी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए केवल राख और तपती धरती ही शेष बचेगी।

पेड़ नहीं, पृथ्वी की लाइफलाइन हैं वनस्पति

दिनेश गावंडे ने पर्यावरण की वर्तमान स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पेड़ों को केवल सजावट या लकड़ी का स्रोत समझना हमारी सबसे बड़ी भूल है। पेड़ वास्तव में पृथ्वी की 'लाइफलाइन' (जीवनरेखा) हैं। वे न केवल हमें प्राणवायु (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं, बल्कि वर्षा चक्र को सुचारू रखने और बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि शहरों के साथ-साथ अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी विकास के नाम पर बड़े पैमाने पर पुराने पेड़ों की बलि दी जा रही है। यह विनाशकारी प्रवृत्ति हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह से तहस-नहस कर रही है।

कागजी वृक्षारोपण और दिखावे की राजनीति पर प्रहार

गावंडे ने सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर होने वाले वृक्षारोपण अभियानों की विफलता पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर साल लाखों पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उनके संरक्षण और देखभाल की भारी अनदेखी की जाती है। उचित सुरक्षा और पानी के अभाव में ये पौधे दम तोड़ देते हैं। गावंडे के अनुसार, वृक्षारोपण केवल फोटो खिंचवाने या सरकारी फाइलों को भरने का जरिया बनकर रह गया है, जबकि जरूरत पौधों को वृक्ष बनाने तक की जिम्मेदारी उठाने की है।

कठोर दंड और सामूहिक जिम्मेदारी की आवश्यकता

बिना अनुमति के होने वाली अवैध पेड़ कटाई पर नाराजगी जताते हुए गावंडे ने मांग की है कि ऐसे कृत्यों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए:

  • निजी संकल्प: प्रत्येक नागरिक अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाने और उसे पाल-पोसकर बड़ा करने का दृढ़ संकल्प ले।
  • शैक्षणिक भूमिका: स्कूल और कॉलेजों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ छात्रों को व्यावहारिक पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना चाहिए।
  • स्थानीय निकायों की सक्रियता: ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को पेड़ काटने वालों पर नजर रखने के साथ-साथ वृक्ष संवर्धन के लिए बजट आवंटित करना चाहिए।

तपती धरती को शांत करने का एकमात्र विकल्प

अंत में दिनेश गावंडे ने जोर देकर कहा कि बढ़ता तापमान और प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति का एक चेतावनी भरा प्रकोप हैं। केवल सरकार के भरोसे रहकर इस वैश्विक संकट से नहीं लड़ा जा सकता। जब तक समाज का हर व्यक्ति अपनी नैतिक जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक यह तपती धरती शांत नहीं होगी। "वृक्ष संवर्धन" ही वह एकमात्र हथियार है जिससे हम ग्लोबल वार्मिंग को मात दे सकते हैं। यदि हम आज सक्रिय नहीं हुए, तो भविष्य में प्रकृति का रौद्र रूप हमें संभलने का मौका भी नहीं देगा।

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