Amravati Municipal Corporation High Court Konark Company: अमरावती जिला गत अनेक माह से विवादों में घिरी मनपा क्षेत्र में साफ-सफाई का कार्य करने वाली मुंबई की कोणार्क कंपनी का ठेका मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने रद्द कर दिया है। अचानक आए इस फैसले से मनपा परिसर में हड़कंप मच गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कोणार्क कंपनी का ठेका रद्द करने तथा नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, जब तक नई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कोणार्क कंपनी को ही साफ-सफाई का कार्य जारी रखने को कहा गया है।
बता दें कि कोणार्क कंपनी को करीब 400 करोड़ रुपए का ठेका सात वर्ष के लिए दिया गया था। अब ठेका रद्द होने के बाद नए सिरे से पूरी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। न्यायालय के आदेश के बाद अब मनपा प्रशासन के सामने नई टेंडर प्रक्रिया जल्द शुरू करने की जिम्मेदारी आ गई है।
उल्लेखनीय है कि मनपा क्षेत्र में साफ-सफाई के लिए मनपा द्वारा टेंडर निकाला गया था। इसमें तीन कंपनियों ने टेंडर भरा था। इनमें उल्हासनगर की कोणार्क कंपनी, नागपुर की अर्बन कंपनी तथा बेंगलुरु की पी। गोपीनाथ कंपनी शामिल थीं। टेंडर प्रक्रिया के बाद यह ठेका उल्हासनगर की कोणार्क कंपनी को दिया गया था।
कोणार्क कंपनी को ठेका दिए जाने के बाद बेंगलुरु की पी। गोपीनाथ कंपनी ने नागपुर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस मामले पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया।
फैसले के अनुसार कोणार्क कंपनी का ठेका रद्द कर दिया गया है तथा मनपा को नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक नई टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कोणार्क कंपनी साफ-सफाई का कार्य जारी रखेगी।
फैसले की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद शहर में यह खबर तेजी से फैल गई। इससे मनपा प्रशासन और राजनीतिक क्षेत्र में खलबली मच गई है। अब कोणार्क कंपनी आगे क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
विशेष रूप से जब से कोणार्क कंपनी को साफ-सफाई का ठेका मिला है, तब से उसके काम करने के तरीके को लेकर शहर के नागरिकों में भारी रोष था। नियमित साफ-सफाई को लेकर शिकायतों का अंबार लगा रहता था।
शहर के नागरिकों के त्रस्त होने के बावजूद मनपा शासन और प्रशासन पर कोणार्क कंपनी के बचाव के आरोप लगातार लगते रहे। समय पर साफ-सफाई नहीं होने से आम नागरिक परेशान हो चुके थे। मनपा की ओर से एड। राहुल धर्माधिकारी तथा याचिकाकर्ता की ओर से एड। गिल्डा ने पक्ष रखा।
कोणार्क कंपनी से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ के फैसले के बाद कांग्रेस ने मनपा के सत्ताधारी पदाधिकारियों और अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी है।
पूर्व पार्षद मुन्ना राठौड़ और औद्योगिक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष समीर जवंजाल ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले को टालने, उसके खिलाफ जाने या अपील के जरिए सफाई व्यवस्था को फिर पुराने ढर्रे पर ले जाने का कोई प्रयास किया गया तो कांग्रेस इसका जोरदार विरोध करेगी।
मनपा परिसर में जारी चर्चा के अनुसार कुछ राष्ट्रीय दलों के पदाधिकारी और पार्षद यह ठेका पुनः कोणार्क कंपनी को ही मिले, इसके लिए प्रयासरत हैं। यह भी चर्चा है कि मनपा न्यायालय के आदेश को लेकर अपनी ओर से याचिका दाखिल कर सकती है। हालांकि इस संबंध में मनपा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।