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महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव एक बार फिर स्थगित हो सकते हैं। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अमरावती जिले की सभी 14 तहसीलों में सूखे की गंभीर स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार चुनाव प्रक्रिया कुछ समय के लिए टालने की मांग कर सकती है।
Amravati Zilla Parishad Election: महाराष्ट्र में स्थानीय स्वराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही है। राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति और मतदाता सूची के विशेष गहन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने को लेकर चुनाव टाला जा सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार न्यायालय से चुनाव प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टालने का अनुरोध कर सकती है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दरअसल, राज्य के कई जिलों के साथ अमरावती जिले की सभी 14 तहसीलों में सूखे की स्थिति गंभीर बनी हुई है।
किसानों को राहत देने के लिए कर्ज पुनर्गठन, कर्जमाफी, परीक्षा शुल्क में छूट और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था जैसे उपाय प्रशासन की प्राथमिकता में हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती प्रशासन के सामने अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। इसी वजह से सहकारी संस्थाओं के चुनाव स्थगित करने के बाद अब जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव भी टलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अमरावती जिला परिषद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 22 मार्च 2022 से यहां प्रशासक के माध्यम से कामकाज संचालित हो रहा है। वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने 26 सीटें जीतकर सत्ता स्थापित की थी। भाजपा को 13, प्रहार को 6 और शिवसेना को 5 सीटें मिली थीं। आरक्षण संबंधी विवाद और निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण के कारण चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इस बीच जिला परिषद निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन से राजनीतिक समीकरण भी बदलेंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दर्यापुर में एक निर्वाचन क्षेत्र कम हुआ है, जबकि अचलपुर तहसील में एक निर्वाचन क्षेत्र बढ़ा है। इससे कई राजनीतिक दावेदारों के चुनावी गणित पर असर पड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के 29 अक्टूबर के निर्देश के बाद ओबीसी आरक्षण संबंधी अपील पर अंतिम फैसला आने तक जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव कराने का रास्ता खुलने की उम्मीद जगी थी। राज्य निर्वाचन आयुक्त दिनेश वाघमारे के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक आदेश प्राप्त होने के बाद ही चुनावी कार्यक्रम को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी, फिलहाल चुनावों को लेकर सरकार के संभावित कदम और निर्वाचन आयोग के अगले निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।