Maharashtra Devsthan Inam Bill: महाराष्ट्र शासन के राजस्व एवं वन विभाग द्वारा प्रस्तावित महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026 राज्य के सहस्रों हिंदू देवस्थानों के स्वायत्त अस्तित्व तथा उनकी आय के स्रोतों को मूल से समाप्त करने वाला है। इस कानून के मसौदे में अत्यंत गंभीर कानूनी त्रुटियां हैं तथा यह हिंदू देवस्थानों के धार्मिक एवं संपत्ति अधिकारों पर प्रत्यक्ष आघात करने वाला है। इस देवस्थान मालिक अधिकार विरोधी मसौदे का हम तीव्र निषेध करते हैं तथा सरकार इसे बिना किसी शर्त के वापस लेने की मांग मंदिर महासंघ के राज्य पदाधिकारी अनूप जैस्वाल ने की।
जैस्वाल ने कहा कि यदि सरकार इस हिंदू विरोधी कानून को लागू करने का प्रयास करेगी, तो संपूर्ण महाराष्ट्र में तीव्र जनआंदोलन छेड़ा जाएगा। इस अवसर पर सनातन संस्था के धर्मप्रसारक संत अशोक पात्रीकर, अंबादेवी देवस्थान के विश्वस्त अधिवक्ता राजेंद्र पांडे, हिंदू जनजागृति समिति के समन्वयक सचिन वैद्य, आशा मनीषा देवस्थान दर्यापुर के विश्वस्त नीलेश जटाले, महारुद्र हनुमान मंदिर, जहांगीरपुर के अध्यक्ष ओमप्रकाश परतानी, कृष्णजी अवधूत बुआ संस्थान, सावंगा विठोबा के अध्यक्ष पुंजाजी नेमाडे उपस्थित थे।
हिंदू जनजागृति समिति के श्रीकांत पिसोलकर ने कहा कि वक्फ संपत्तियों को विशेष संरक्षण, जबकि मंदिरों की भूमियों पर अधिकार करने हेतु कानून बनाना यह भेदभाव निंदनीय है। राजेंद्र पांडे ने कहा कि प्रस्तावित अधिनियम के कारण राज्य की देवस्थान इनाम भूमियों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
मंदिरों के स्वामित्व वाली भूमियां कब्जेदारों, मिरासदारों, पुजारियों अथवा अन्य धारकों के नाम पर जाने का मार्ग खुल जाएगा। इससे मंदिरों के पारंपरिक आय स्रोत समाप्त होने की आशंका उत्पन्न हो गई है। मसौदे की कुछ धाराओं के माध्यम से अनधिकृत धारकों अथवा दीर्घकाल से कब्जे में रहने वाले व्यक्तियों को भूमियों के अधिकार देने का प्रावधान होने से मंदिरों की संपत्तियों पर अतिक्रमण करने वालों को कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा।