अपर वर्धा डैम (फोटो नवभारत)
अमरावती

अपर वर्धा परियोजना से अमरावती के येरला को मिलेगा पानी, 2046 तक की जरूरत को ध्यान में रखकर हुआ जल आरक्षण

Amravati Yerla Drinking Water: अमरावती के मोर्शी तहसील स्थित येरला गांव के लिए अपर वर्धा परियोजना से 0.093938 दलघमी गैर-सिंचाई जल आरक्षण को मंजूरी मिली है। इससे गांव की पेयजल समस्या खत्म होगी!

आलोक उमाकृष्ण

Amravati Yerla Drinking Water Reservation: अमरावती जिले की मोर्शी तहसील स्थित ग्राम पंचायत येरला में ग्रामीणों को पेयजल की किल्लत से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।

महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने जीआर जारी कर अपर वर्धा परियोजना से बेरला ग्राम पंचायत की नई पेयजल योजना के लिए गैर-सिंचाई जल आरक्षण को मंजूरी दे दी है। जिसमें अब येरलावासियों को 0.093938 दलघमी पानी का हक दिया गया है।

इस गांव के बाहर एक टंकी बनाई गई थी, जिससे गांव को जलापूर्ति होती थी। गांव में अब अपर वर्धा से पेयजल मिलने का रास्ता साफ होने से गांववासियों में हर्ष का माहौल है।

2046 की जनसंख्या को ध्यान में रखकर फैसला

सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार वर्ष 2046 तक की अनुमानित जनसंख्या की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह आरक्षण स्वीकृत किया गया है। नागपुर विदर्भ पाटबंधारे विकास महामंडल के कार्यकारी निदेशक द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और महाराष्ट्र जल संपत्ति नियमन प्राधिकरण के निर्देशों के आधार पर जल संसाधन मंत्रालय ने यह स्वीकृति प्रदान की है।

5 वर्षों के भीतर पानी उठाना अनिवार्य

यदि ग्राम पंचायत या संबंधित एजेंसी इस शासन निर्णय की तिथि से अगले 5 वर्षों के भीतर आवंटित जल का प्रत्यक्ष उपयोग शुरू नहीं करती है, तो यह आरक्षण स्वतः रद्द मान लिया जाएगा। जलाशय से उपलब्ध कराए जाने वाले पानी को पीने योग्य बनाने के लिए आवश्यक ट्रीटमेंट/शुद्धीकरण के उपाय करने की संपूर्ण जिम्मेदारी ग्राम पंचायत/संबंधित संस्था की होगी। पेयजल आपूर्ति के लिए निर्धारित प्रारूप में समय पर अनुबंध

ग्रामीणों में छा गई की खुशी की लहर

मोर्शी तहसील के येरला गांव में नई जल आपूर्ति योजना के लिए जल आरक्षण मिलने से गांव में भविष्य में पीने के पानी की किल्लत दूर होगी। शासन के इस निर्णय से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में खुशी का माहौल है।

प्राधिकरण के निर्धारित मापदंड

यह मंजूरी योजना के समर्थन में दिया गया पत्र है। हर वर्ष मिलने वाली वास्तविक जल की मात्रा जलाशय के जलस्तर और प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मापदंडों के आधार पर तय की जाएगी। यदि जल स्रोत को प्रदूषित किया जाता है, तो संबंधित उपभोक्ता पर दंडात्मक जल शुल्क लागू किया जाएगा।

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