अमरावती महानगरपालिका (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
अमरावती

संजय खोडके की 'नो एंट्री' शर्त! 'रवि राणा साथ रहे तो भाजपा को नहीं देंगे समर्थन,' अमरावती में फंसा पेंच

Amravati Mayor Election: अमरावती में 25 सीटों वाली भाजपा को 45 की दरकार। रवि राणा के समर्थन पर संजय खोडके की शर्त ने बिगाड़ा खेल। जानें कौन बनेगा महापौर?

प्रिया जैस

Amravati Municipal Corporation Results: अमरावती मनपा के चुनाव परिणाम सामने आने के बाद शहर की राजनीति में असमंजस की स्थिति बन गई है। 87 सीटों वाली मनपा में किसी भी दल को 45 सीटों के बहुमत का आंकड़ा नहीं मिला है, जिससे सत्ता गठन को लेकर खींचतान तेज हो गई है।

सबसे बड़ा दल होने के बावजूद भाजपा बहुमत से दूर है, वहीं कांग्रेस समेत अन्य दल भी सत्ता की संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं। नतीजों के बाद बंद कमरे की बैठकों, गठबंधन की कोशिशों और राजनीतिक दांव-पेंच ने महापालिका की सत्ता को लेकर सस्पेंस और गहरा कर दिया है।

कांग्रेस-बीजेपी नेताओं के बीच बंद कमरे में चर्चा

परिणामों के अनुसार बीजेपी को 25, कांग्रेस पार्टी और युवा स्वाभिमान पार्टी को 15-15, एमआईएम को 12, अजित पवार गुट के राष्ट्रवादी को 11, शिंदे सेना को 3, उद्धव सेना को 2 और वंचित को 1 सीट मिली है। ऐसे में सत्ता स्थापना के लिए फोड़-फोड़ या निर्दलीयों की शरण में जाने का कोई विकल्प नहीं है। इसके बाद पार्षदों ने अपने-अपने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने का सिलसिला शुरू कर दिया है और कांग्रेस-बीजेपी दोनों के नेताओं के बीच बंद कमरे में चर्चा हो रही है।

राजनीतिक गणित का संकट

सत्ता स्थापित करने के लिए 87 में से 45 नगरसेवकों का समर्थन आवश्यक है। इस समय भाजपाई अपनी महापौर की उम्मीदवारी पर पूरी तरह से जोर दे रहे हैं, जबकि कांग्रेस भी अपनी ताकत बढ़ाकर सत्ता में वापसी की पूरी कोशिश कर रही है।

बीजेपी की रणनीति क्या होगी

भले ही बीजेपी सबसे बड़ा दल हो, लेकिन अकेले 25 सीटों पर सत्ता स्थापित करना उसके लिए मुश्किल हो रहा है। यदि बीजेपी युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ गठबंधन करती है, तो यह गठबंधन 40 सीटों तक पहुंच सकता है, फिर भी बहुमत के लिए 5 सीटों की और आवश्यकता होगी। ऐसे में, शिंदे गुट, बसपा या किसी अन्य छोटे दल से हाथ मिलाने की संभावना बढ़ गई है।

कांग्रेस की स्थिति

कांग्रेस के पास 15 सीटें हैं और सत्ता के लिए 30 और नगरसेवकों की आवश्यकता है। कांग्रेस को इस समय राष्ट्रवादी, एमआईएम, शिंदेसेना, उद्धव सेना और वंचित जैसे दलों को एक साथ लाना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य है। हालांकि, भाजपा विरोधी गठबंधन का मुद्दा सबको एकजुट कर सकता है, जिसके कारण कांग्रेस की रणनीति पर सभी की नजरें लगी हुई हैं।

महापौर की कुर्सी पर संघर्ष

महापौर पद को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर हो रही है। बीजेपी का दावा है कि महापौर तो बीजेपी का ही होगा, वहीं कांग्रेस भी अपनी तरफ से जोर लगा रही है। इस महापौर पद की दौड़ में कौन आगे रहेगा और किसे किसका समर्थन मिलेगा, यह आगामी दिनों में ही साफ होगा।

इतिहास क्या कहता

2017 में बीजेपी ने 45 सीटों पर जीत हासिल कर महापालिका में सत्ता स्थापित की थी। 2012 में कांग्रेस ने 25 सीटों के साथ राष्ट्रवादी के साथ गठबंधन करके सत्ता बनाई थी। 2007 में भी कांग्रेस सत्ता में थी। ऐसे में, इतिहास को देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में लौट सकती है।

रवि राणा का दावा, राष्ट्रवादी की शर्तें

विधायक रवि राणा ने सोशल मीडिया पर कहा है कि महापौर भाजपा का ही होगा, जबकि राष्ट्रवादी के संजय खोडके ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर बीजेपी ने रवि राणा को साथ लिया, तो हम सत्ता स्थापना में सहयोग नहीं करेंगे।

सस्पेन्स कायम

अमरावती महापालिका की सत्ता की लड़ाई अब पूरी तरह से गणित के खेल से ज्यादा राजनीति की खींचतान बन चुकी है। कौन पार्टी किसे समर्थन देती है और किसकी सत्ता स्थापित होती है, यह आने वाले दिनों में ही साफ होगा।

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