Amravati Municipal Corporation (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया) 
अमरावती

अमरावती मनपा में 100 करोड़ के फंड पर घमासान, कर्ज चुकाएं या वार्ड विकास करें?

Development Fund: अमरावती महानगरपालिका को 15वें वित्त आयोग और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिले करीब 100 करोड़ रुपये के फंड के उपयोग को लेकर प्रशासन और पार्षदों के बीच विवाद गहराता जा रहा है।

महाराष्ट्र डेस्क

Amravati Municipal Corporation: अमरावती मनपा को 15 वें वित्त आयोग और विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिले करीब 100 करोड़ रुपये के फंड के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच खींचतान शुरू होने के आसार हैं। एक तरफ जहां मनपा पर बैंकों का 28 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट बकाया है और प्रशासन इसे चुकाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ पार्षदों ने अपनेअपने वार्डों के विकास कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये का फंड जारी करने की मांग तेज कर दी है।फोटोमहानगरपालिकाआर्थिक बोझ बढ़ रहामनपा की वित्तीय स्थिति पहले से ही डगमगाई हुई है।

पूर्व मनपा आयुक्त सौम्या शर्मा के कार्यकाल में दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए बैंकों से 31 करोड़ रुपये का ओवरड्राफ्ट लिया गया था। इसमें से 3 करोड़ रुपये तो लौटा दिए गए हैं, लेकिन 28 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। इस उधारी पर हर महीने भारी ब्याज देना पड़ रहा है, जिससे मनपा के खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।इसी बीच, शासन से 15 वें वित्त आयोग और अन्य रुकी हुई योजनाओं का लगभग 100 करोड़ रुपये का फंड मनपा को प्राप्त हुआ है।

ओवरड्राफ्ट का बढ़ता ब्याज बना चिंता का विषय

नियम के मुताबिक, 15 वें वित्त आयोग के फंड को मुख्य रूप से स्वच्छता, जलापूर्ति, ठोस कचरा प्रबंधन और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर ही खर्च करना अनिवार्य है। चूंकि पहले ओवरड्राफ्ट भी इन्हीं कामों के लिए लिया गया था, इसलिए वर्तमान आयुक्त ने इस फंड से कर्ज चुकाने का मन बनाया है।

प्रशासन और पार्षदों में मतभेददूसरी ओर, पार्षदों का कहना है कि उनके वार्डों में विकास कार्य रुके हुए हैं, जिसके लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया जाना चाहिए। इस विषय को आगामी आमसभा जनरल बॉडी मीटिंग में रखा जाएगा, जहां इस पर अंतिम फैसला होना है। वर्तमान में आचार संहिता लागू होने के कारण कोई भी नीतिगत निर्णय लेना संभव नहीं है, इसलिए पार्षदों को आमसभा का इंतजार है।

फंड उपयोग पर मचा राजनीतिक संग्राम

हालांकि, प्रशासन का रुख साफ है कि सरकार ने जिस उद्देश्य के लिए फंड मंजूर किया है, उसे उसी पर खर्च किया जाएगा। ऐसे में आगामी आमसभा में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा होने की संभावना जताई जा रही है।

फंड के इस्तेमाल पर टकराव की स्थिति

मनपा प्रशासन इस 100 करोड़ के फंड के बड़े हिस्से का उपयोग कर्ज चुकाने के लिए करना चाहता है, जबकि पार्षद वार्ड स्तर के कामों के लिए अलग बजट मांग रहे हैं। चूंकि आयुक्त वित्त आयोग के नियमों के मुताबिक ही खर्च करने पर अड़े हैं, इसलिए आगामी आमसभा में प्रशासन और जनप्रतिनिधि आमने-सामने आ सकते हैं।

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