Amravti Chandrashekhar Bawankule Crop Damage Farmer Compensation: अमरावती जिले में एक महीने से अधिक समय से बारिश में लंबे अंतराल के कारण सोयाबीन, कपास और तुअर की फसल प्रभावित होने की बात सामने आई है।
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने खेतों का निरीक्षण कर प्रभावित फसलों के पंचनामे के निर्देश दिए।
अमरावती जिले में बारिश के लंबे खंड ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सोयाबीन के दाने पूरी तरह विकसित नहीं होने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि कपास और तुअर की फसल पर भी असर पड़ा है। स्थिति का जायजा लेने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले खेतों में पहुंचे। उन्होंने किसानों से चर्चा कर नुकसान की जानकारी ली और प्रभावित फसलों के तत्काल पंचनामे कराने के निर्देश दिए।
अमरावती, ब्यूरो। जिले में पिछले एक महीने से अधिक समय से बारिश में लंबा अंतराल बना हुआ है। बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी सोयाबीन, कपास और तुअर की फसल प्रभावित हुई है।
विशेष रूप से सोयाबीन के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाने की आशंका जताई जा रही है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ने की चिंता किसानों में है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने के कारण फसलों की स्थिति कमजोर होने की जानकारी किसानों ने पालकमंत्री के सामने रखी।
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने तिवसा तहसील के किशोर पिंपले और राजू बहादुरपुरे के खेतों का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर सोयाबीन सहित अन्य फसलों की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत की और बारिश के अभाव के कारण फसलों को हुए नुकसान तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। किसानों ने बारिश में आए लंबे अंतराल से उत्पादन पर पड़ने वाले संभावित असर की जानकारी दी।
फसल की स्थिति का जायजा लेने के बाद बावनकुले ने संबंधित अधिकारियों को प्रभावित फसलों का निरीक्षण कर पंचनामे करने के निर्देश दिए। फसल नुकसान का आकलन होने के बाद किसानों को राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।
पालकमंत्री ने कहा कि संकटग्रस्त किसानों को फसल नुकसान की उचित भरपाई दिलाने के लिए सरकार के समक्ष मजबूती से आग्रह किया जाएगा।
बारिश के लंबे अंतराल से प्रभावित किसानों के लिए अब फसल सर्वेक्षण और पंचनामे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नुकसान का वास्तविक आकलन होने के बाद ही राहत और मुआवजे से जुड़ी आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होगी।
किसानों की नजर अब प्रशासन की ओर से होने वाले सर्वेक्षण और सरकार के स्तर पर लिए जाने वाले फैसले पर है।