Amravati TB Test Kit Shortage: एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 'टीबी-मुक्त भारत' का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं जिले के बीपीएचयू केंद्रों में टीबी रोग की जांच के लिए आवश्यक किट्स की कमी पैदा हो गई है। पिछले एक महीने से टू-नैट मशीन की किट्स उपलब्ध न होने से जांच की गति धीमी हो गई है और अत्याधुनिक यंत्रणा होने के बावजूद मरीजों को इंतजार करना पड़ रहा है।
बीपीएचयू केंद्रों में टू-नैट मशीन उपलब्ध कराने के पीछे टीबी रोग का जल्दी और सटीक उपचार करने का उद्देश्य है। मात्र, इस मशीन के लिए आवश्यक किट्स की आपूर्ति ही ठप होने से अत्याधुनिक यंत्रों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है। पिछले महीने भर से किट्स उपलब्ध न होने से जांच का काम धीमी गति से शुरू होने की जानकारी है। टीबी रोग एक संक्रामक बीमारी होने से इसका समय पर पता चलना उपचार की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। जांच में देरी होने से मरीज के उपचार के साथ-साथ संक्रमण के प्रसार को रोकने के प्रयासों पर भी असर होने की संभावना होती है।
टीबी रोग का उन्मूलन करने के लिए शासन द्वारा विभिन्न अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके लिए ग्रामीण और दुर्गम भाग के नागरिकों को उनके नजदीक ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। मात्र, जिस केंद्र पर टीबी रोग की जांच होना अपेक्षित है, वहां आवश्यक किट्स उपलब्ध न हों तो 'टीबी-मुक्त भारत' का लक्ष्य कैसे साध्य होगा, यह सवाल उठ रहा है। घोषणा और प्रत्यक्ष स्वास्थ्य केंद्रों की परिस्थिति में मौजूद अंतर से अनेक गड़बड़ी सामने आ रही है। इसलिए किट्स की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की जरूरत निर्माण हुई है।
स्वास्थ्य केंद्रों की प्रयोगशाला मरीजों की अचूक जांच, निदान के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए कर्मचारी नियमित उपलब्ध न होने पर जांच के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। किसी भी अस्पताल का दौरा करते समय वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रत्यक्ष निरीक्षण कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करना चाहिए।
अमरावती प्रभारी टीबी रोग अधिकारी डॉ. ज्योति खडसे ने कहा कि बीपीएचयू केंद्रों में टू-नैट मशीन की किट्स फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। मात्र, कुछ दिनों में किट्स उपलब्ध होंगी। इसके लिए कार्यालय द्वारा हर महीने किट्स की मांग की जा रही है।
ग्रामीण व दुर्गम भाग के नागरिकों को उनके नजदीक योग्य स्वास्थ्य सेवा और आवश्यक जांच उपलब्ध कराने के लिए बीपीएचयू केंद्रों का निर्माण किया गया है। मात्र, किट्स का अभाव, जांच की धीमी गति और कर्मचारियों की उपस्थिति पर नियंत्रण का अभाव रहा तो इन केंद्रों के निर्माण के पीछे का मूल उद्देश्य खतरे में आने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारियों ने केवल कागजी रिपोर्ट पर विश्वास न रखते हुए बीपीएचयू केंद्रों का औचक निरीक्षण करना चाहिए। टू-नैट किट्स की तुरंत आपूर्ति करनी चाहिए और लैब टेक्निशियन की उपस्थिति की कड़ाई से जांच करनी चाहिए, ऐसी अपेक्षा व्यक्त हो रही है।
दरम्यान, जिले के कुछ बीपीएचयू केंद्रों के लैब टेक्निशियन के कामकाज पर भी सवाल खड़े हुए है। संबंधित कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण न होने से कुछ जगहों पर रोजाना नियमित ड्यूटी करने के बजाय आहे दिन ड्यूटी की जा रही है, ऐसी जानकारी सामने आई है।