Amravati BJP Hindutva Protest: भाजपा की ओर से शनिवार को राजकमल चौक में विधायक प्रवीण पोटे पाटिल के नेतृत्व में सुंदरकांड पाठ एवं सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि यह आयोजन इस भावना के साथ किया गया कि उद्धव ठाकरे, शिवसेना संस्थापक हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा से भटक गए हैं। उनके लिए सद्बुद्धि और सन्मति की कामना करते हुए सामूहिक प्रार्थना की गई।
इस अवसर पर सांसद डॉ. अनिल बोंडे, विधायक राजेश वानखड़े, महापौर श्रीचंद तेजवानी, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी, मनपा पक्ष नेता चेतन गावंडे, जयंत डेहनकर, किरण पातुरकर, तुषार भारतीय, नितिन गुडधे, चेतन पवार और स्वीकृत पार्षद एड. प्रशांत देशपांडे प्रमुखता से उपस्थित थे।
विधायक रवि राणा और भाजपा नेत्री नवनीत राणा ने हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद उद्धव ठाकरे को हनुमान चालीसा का पाठ करने का सार्वजनिक निमंत्रण देते हुए उन पर हिंदुत्व के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में निलेशचंद्र मुनि, उपमहापौर सचिन भेंडे, सुनील राणा, सुनील खराटे, पूर्व जिलाध्यक्ष रविराज देशमुख, ललित समदुरकर, पार्षद राधा कुरील सहित पार्टी के पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता उपस्थित थे।
नवनीत राणा ने कहा कि उद्धव ठाकरे को अमरावती यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी आकर हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता में रहते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ विश्वासघात किया। वर्ष 2022 के हनुमान चालीसा प्रकरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें 14 दिन जेल में रहना पड़ा, लेकिन इससे उनकी आस्था और मजबूत हुई।
सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता करने का आरोप लगाया। सत्ता में रहते हुए मंदिर बंद किए गए और अब राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद भगवान श्रीराम की याद आ रहे हैं। उध्दव को 2019 में कुबुध्दि हो गई थी। इसीलिए उन्होंने राम का का साथ छोड़कर कांग्रेस से युति की थी। अब हिंदुओं का समर्थन वापस पाने के लिए रामरक्षा का पाठ किया जा रहा है, लेकिन जनता सब समझ चुकी है।
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प्रवीण पोटे ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रामजन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी, जबकि उद्धव ठाकरे का राम के प्रति समर्पण केवल राजनीतिक दिखावा है। ठाकरे को अब अपने हाथ से सत्ता निकलती दिखाई दे रही है तो अब राम रक्षा का पठन कर रहे हैं। भाजपा के बड़े पदाधिकारी से लेकर छोटे कार्यकर्ता को रामरक्षा का पूरा पठन याद है, उन्हें पुस्तक की जरूरत नहीं है। उध्दव अपनी आने वाली पीढ़ी और तोते की राजनितिक रक्षा के लिए यह सब कर रहे हैं।