अकोला: महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कुछ लोगों ने मिलकर वन्यजीव काले हिरण (ब्लैकबक) का शिकार किया और उसका मांस पकाकर खाने की योजना बनाई। लेकिन उनकी यह योजना ज्यादा देर तक छिपी नहीं रह सकी। जब वे मांस पकाकर थाली में परोसने ही वाले थे, तभी वन विभाग की टीम ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
यह पूरी कार्रवाई अकोट वनपरिक्षेत्र के जऊळखेड गांव में हुई। विभाग को खुफिया सूचना मिली थी कि कुछ लोग जंगल में शिकार कर मांस घर लाकर पका रहे हैं और उसे बेचने की भी योजना बना रहे हैं। इसी सूचना के आधार पर विभाग ने एक विशेष दल गठित कर कार्रवाई की और घटनास्थल पर छापा मारा।
जैसे ही वन विभाग की टीम पहुंची, उन्होंने देखा कि दिगंबर जनकीराम घारे नामक व्यक्ति के घर में हिरण का मांस पकाया जा रहा है। पूछताछ में पता चला कि इस अपराध में अंकुश गणेश इंदोरे और उसके पिता गणेश दयाराम इंदोरे भी शामिल हैं। दोनों को तत्काल हिरासत में लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शिकार की साजिश ईश्वर बाळकृष्ण इंदोरे नामक व्यक्ति ने रची थी, जो अभी फरार है। उसने ही जंगल में काले हिरण का शिकार किया और मांस को अन्य आरोपियों में बांट दिया।
वन विभाग ने मौके से आधा किलो पकाया हुआ हिरण का मांस बरामद किया है। आरोपियों पर भारतीय वन अधिनियम 1927 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने उन बर्तनों और औजारों को भी जब्त किया जिनका उपयोग शिकार के मांस को पकाने में किया गया था। वन विभाग अब फरार आरोपी की तलाश में जुटा हुआ है और यह संभावना जताई जा रही है कि यह गिरोह पहले भी वन्यजीवों का शिकार करता रहा है।
यह संपूर्ण अभियान उपवनसंरक्षक सुमंत सोलंके और सहायक वनसंरक्षक नम्रता ताले के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया। कार्रवाई का नेतृत्व वनपरिक्षेत्र अधिकारी वी. आर. थोरात कर रहे थे, जिनकी टीम में पी. ए. तुरुक, अतीक हुसैन, सुभाष काटे, सोपान रेळे और तुषार आवारे जैसे कर्मठ वनरक्षक शामिल थे।
वन विभाग ने एक बार फिर आम नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसके लिए जागरूक होना होगा। वन्यजीव हमारे पर्यावरण के संतुलन का आधार हैं। उनकी रक्षा करना हम सबका नैतिक कर्तव्य है।
यदि कोई व्यक्ति वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाता है, उनका शिकार करता है या जंगल में आग लगाने जैसी गतिविधि करता है, तो तुरंत सरकारी टोल फ्री नंबर 1926 पर संपर्क करें। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम गोपनीय रखा जाएगा। आपकी एक छोटी-सी सतर्कता, एक बेजुबान प्राणी की जान बचा सकती है”, यह अपील वन अधिकारी वी. आर. थोरात ने की।