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काटेपूर्णा बांध में घटते जलसंचय को देखते हुए अकोला मनपा ने शहर में 10 दिन में एक बार पानी देने का निर्णय लिया है।
पहले बांध से प्रतिदिन 8.20 एमएलडी पानी लिया जाता था, जिसे घटाकर अब 4.50 एमएलडी कर दिया गया है।
उपलब्ध जलसंचय और बाष्पीकरण की स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में मनपा को बांध के मृत जलसंचय से पानी लेने की नौबत आ सकती है।
Akola Water Shortage: काटेपूर्णा बांध में उपलब्ध जलसंचय को देखते हुए अकोला मनपा के जलापूर्ति विभाग ने शहर में 10 दिन में एक बार पानी की आपूर्ति शुरू कर दी है। साथ ही बांध से पानी की निकासी में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। पहले प्रतिदिन 8.20 एमएलडी पानी लिया जाता था, लेकिन अब यह मात्रा घटाकर 4.50 एमएलडी कर दी गई है। आने वाले महीनों में पानी की निकासी और कम होने की आशंका है।
ऐसे में शहरवासियों को आगामी दिनों में गंभीर जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। अकोला शहर को वर्ष 2004-2005 के बाद एक बार फिर पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। उस समय भी परियोजना के मृत जलसंचय से पानी लेना पड़ा था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए फरवरी अथवा अप्रैल महीने में मनपा को फिर से मृत जलसंचय से पानी लेने की नौबत आने की आशंका जताई जा रही है।
काटेपूर्णा परियोजना में 10 दलघमी से अधिक पानी उपलब्ध है। लेकिन प्रतिदिन होने वाले वाष्पीकरण को देखते हुए उपलब्ध जलसंचय का लगभग 25 प्रश. पानी बाष्पीकरण के कारण कम होने की आशंका है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए फिलहाल परियोजना से हर महीने लगभग 1.30 दलघमी पानी की निकासी की जा रही है। नवंबर, दिसंबर और जनवरी इन तीन महीनों में परियोजना से लगभग 4 से 4.5 दलघमी पानी लिया जाएगा। इसके बाद जलसंचय की स्थिति और गंभीर होने की आशंका है। ऐसे में फरवरी अथवा अप्रैल महीने में मनपा को मृत जलसंचय से पानी लेने की आवश्यकता पड़ सकती है।
काटेपूर्णा परियोजना का मृत जलसंचय 11 दलघमी है। हालांकि, इसमें लगभग 5 दलघमी गाद जमा होने के कारण इसकी वास्तविक क्षमता घटकर केवल 6 दलघमी रह गई है। इसके बावजूद गाद के कारण मृत जलसंचय की उपलब्ध क्षमता और कम होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
मनपा ने पानी की बर्बादी रोकने के लिए विभिन्न उपाय किए हैं। हालांकि, इन उपायों पर उचित तरीके से अमल नहीं होने के कारण जल संरक्षण के प्रयास अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।
इसके चलते भूजल स्तर में भी लगातार गिरावट आने की बात सामने आ रही है। शहर के विस्तारित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य जारी हैं। इसके बावजूद मनपा का इस ओर पर्याप्त
एक ओर उपलब्ध जलसंचय तेजी से घट रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी की बचत और भूजल संरक्षण के उपायों का क्रियान्वयन नहीं होने से जलसंकट और गंभीर होने की आशंका है।