Akola Water Crisis Due To Delayed Monsoon: मानसून के आगमन में हो रही देरी के कारण अकोला जिले में जल संकट दिन-प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है। तेज गर्मी, लगातार बढ़ते तापमान और तेजी से हो रहे इवापोरेशन के चलते जिले के बांधों और सिंचाई परियोजनाओं में जल भंडार तेजी से घट रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि मुर्तिजापुर तहसील के 57 गांवों की प्यास बुझाने वाला उमा प्रकल्प भी लगभग सूखने की कगार पर पहुंच गया है। अकोला शहर की जलापूर्ति का प्रमुख स्रोत काटेपूर्णा सिंचाई परियोजना में भी पानी का भंडार तेजी से कम हो रहा है।
वर्तमान में यहां केवल करीब 20.21 प्रतिशत पानी शेष बचा है। यदि आगामी कुछ दिनों तक मानसून नहीं पहुंचा तो जिले में गंभीर जल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति से ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता का माहौल है तथा प्रशासन और जलापूर्ति विभाग की परेशानी भी बढ़ गई है।
जिले के प्रमुख जल प्रकल्पों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वान प्रकल्प में 42 %, मोर्णा प्रकल्प में 40.83 %, काटेपूर्णा बांध में लगभग 20.21 %, निर्गुणा बांध में 17.30 %, घुंगशी बैरेज में 13.25 %और उमा प्रकल्प में मात्र 4.17 % जल भंडार शेष रह गया है।
घटते जलस्तर के कारण खारे पानी पट्टे के कई गांवों में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। कई गांवों में पिछले एक महीने से नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, जिसके कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए दूर-दूर तक भटकना पड़ रहा है। अकोला शहर के मुर्तिजापुर तहसील की लांघापुर प्रादेशिक जलापूर्ति योजना से जुड़े 57 गांव पूरी तरह उमा प्रकल्प पर निर्भर हैं। ऐसे में अगले दो-चार दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर इन गांवों में विकट जल संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।
जलापूर्ति विभाग के अनुसार भीषण गर्मी के कारण प्रतिदिन करीब 17 मिमी पानी वाष्प बनकर उड़ रहा है। यदि तापमान इसी प्रकार बना रहा तो आने वाले दिनों में लगभग 8 से 9 मिलियन घनमीटर पानी केवल वाष्पीकरण के कारण समाप्त होने की आशंका है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाला समय अकोला जिले के लिए जल संकट की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।