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अकोला जिले के पातुर नंदापुर गांव में सूखे के कारण एकमात्र कुएं का जलस्तर लगातार घट रहा है।
गांव को छह हिस्सों में बांटकर जलापूर्ति की जा रही है। प्रत्येक हिस्से को लगभग 20 दिन बाद पानी मिलता है।
कुएं से लगातार तीन दिन पानी निकालने के बाद ही एक टंकी भर पाती है।
Jal Jeevan Mission Akola: अकोला जिले के पातुर नंदापुर गांव में सूखे के कारण कुएं का जलस्तर घटने से पेयजल संकट गंभीर हो गया है। करीब 10 हजार की आबादी वाले गांव में जलस्वराज मिशन के तहत उपलब्ध एकमात्र कुएं का पानी लगातार कम हो रहा है। स्थिति यह है कि तीन दिन तक पानी निकालने के बाद एक टंकी भर पाती है।
ग्राम पंचायत ने गांव को छह हिस्सों में बांटकर जलापूर्ति की व्यवस्था की है। एक टंकी से केवल एक हिस्से में पानी दिया जाता है, जिसके कारण प्रत्येक हिस्से की बारी लगभग 20 दिन बाद आती है। दो साल से जलापूर्ति योजना शुरू होने का इंतजार जल जीवन मिशन के तहत कानडी तालाब से गांव तक पानी पहुंचाने के लिए टंकी और पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन दो साल बीतने के बाद भी योजना से जलापूर्ति शुरू नहीं हुई।
ग्रामीणों का कहना है कि तालाब में पानी नहीं होने से योजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। अब पशुओं के लिए भी पानी की समस्या खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल पेयजल की व्यवस्था करे। साथ ही 15वें वित्त आयोग की निधि से सूखे की स्थिति में आवश्यक उपाय करने की अनुमति ग्राम पंचायत को दी जाए।
प्रशासक सचिन लाखे ने कहा कि उन्हें पर्याप्त अधिकार नहीं मिले हैं, फिर भी पेयजल समस्या का समाधान करने के लिए उचित विकल्प तलाशे जा रहे हैं।
ग्राम विकास अधिकारी डी.आर. वानखड़े ने बताया कि जलस्वराज कुएं के पास बोरवेल बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।
न्यायालय में मामला लंबित होने के कारण निधि खर्च करने में कठिनाई आ रही है।