काॅन्सेप्ट फोटो (सोर्स सोशल मीडिया) 
अकोला

अकोला मनपा चुनाव: समस्या जस की तस, मिल रहे नए वादे, मतदाताओं को आकर्षित करने पार्टियां कर रही प्रयास

Akola News: अकोला मनपा चुनाव अंतिम दौर में हैं। पुराने मुद्दे जस के तस हैं, लेकिन नए वादों की बाढ़ है। 80 सीटों के लिए 469 उम्मीदवार मैदान में हैं। अपराधी छवि, गठबंधन राजनीति और पार्टी बदलते

रूपम सिंह

Akola Municipal Corporation Election: महानगरपालिका चुनाव की गतिविधियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। महानगर में मूलभूत समस्याएं भले ही पुरानी हों, लेकिन नागरिकों को फिलहाल नए चेहरों से नए वादे मिल रहे हैं। ऐसी समस्याएं जिनका पिछले दस सालों में समाधान नहीं हुआ, जिन्हें समस्या की जड़ का पता नहीं, यहां तक कि जो नए प्रत्याशी बनकर उभरे हैं, वे भी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के खोखले वादे कर रहे हैं।

आगामी 15 जनवरी को होने वाले  अकाेला मनपा चुनाव के मौके पर सभी राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी, निर्दलीय प्रत्याशी प्रभागों में मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रयास करते नजर आ रहे हैं । महानगरपालिका की 80 सीटों के लिए 469 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं और उनके इर्द-गिर्द मौजूद समर्थक सभी पार्टियों और उनके प्रत्याशियों को जीत का भरोसा दिलाने के साथ ही हर प्रत्याशी पार्षद पद की दौड़ में शामिल हो रहा है । मनपा का चुनाव लड़ रहे 56 उम्मीदवारों पर गंभीर अपराध दर्ज हैं । इस तरह जिन पर अपराध दर्ज है ऐसे लोगों को भी मनपा चुनाव में कुछ पार्टियों द्वारा उम्मीदवारी दी गयी है।

मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए, किए जा रहे तरह-तरह के प्रयोग

विरोधी उम्मीदवारों को हराने और उनके वोटों को मोडने के लिए तरह-तरह के प्रयोग और प्रयास किए जा रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस और राकांपा शरद पवार गुट का गठबंधन है। इसके अलावा भी अन्य राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में है । कुल मिलाकर महानगरपालिका चुनाव में विकास के मुद्दे गुम होते दिख रहे हैं । समझदार और जागरूक मतदाता ही भ्रमित हैं।

पता नहीं चल रही कार्यकर्ताओं की निष्ठा

  • कई ऐसे प्रत्याशी भी है जो अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इसलिए कौन सी पार्टी और उनकी निष्ठा किस पार्टी के प्रति है? यह जांच का विषय बन गया है।
  • एक तरफ महागठबंधन में शामिल भाजपा और एनसीपी (अजित पवार) गुट मिलकर चुनाव लड़ रहे है। दूसरी तरफ चुनाव मैदान में सबसे ज्यादा उम्मीदवार शिंदे शिवसेना के हैं।
  • हालांकि संभावना है कि महागठबंधन के सभी पार्षद निर्वाचित होने के बाद फिर से एक साथ बैठेंगे, लेकिन दोनों पार्टियों के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं।

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