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अकोला में 38 सीटों के साथ भाजपा सबसे आगे, लेकिन विधायक पठान के एक दांव ने उड़ाई सत्ताधारियों की नींद!

BJP Akola Seats: भाजपा को बहुमत के लिए 3 वोटों की दरकार। विधायक साजिद खान पठान के 'विपक्षी गठबंधन' के आह्वान से बढ़ा तनाव। अब महापौर आरक्षण का इंतजार।

प्रिया जैस

Akola Mayor Politics: अकोला महानगरपालिका चुनाव के नतीजों के साथ ही सत्ता की तस्वीर साफ हो गई है। हालांकि, महापौर पद के लिए आरक्षण अभी तक घोषित नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में काफी उत्सुकता है। चूंकि सत्ता का आगे का हिसाब इस बात पर निर्भर करता है कि रिज़र्वेशन किस कैटेगरी के लिए है, आरक्षण की स्थिति अभी तक स्पष्ट न होने के कारण राजनीतिक गतिविधियों में तेजी नहीं आ रही है।

हालांकि मनपा चुनाव खत्म हो गए हैं, लेकिन महापौर पद के लिए आरक्षण अभी तक जारी नहीं हुआ है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग के नागरिकों या ओपन कैटेगरी में से किसके लिए महापौर पद का आरक्षण जारी होगा, और क्या उसमें भी महिला के लिए महापौर का पद आरक्षित होगा? कई दिग्गजों की किस्मत इसी पर निर्भर करती है।

  • 38 सीटों पर भाजपा का कब्जा
  • 03 मतों की है जरुरत

अकोला मनपा की 80 सीट

इस मुश्किल समय में, कई पार्षद अभी से मोर्चा बनाने में जुट गए हैं, इस उम्मीद में कि उनकी किस्मत खुल सकती है। अकोला मनपा की 80 सीटों में से भाजपा ने 38 सीटें जीती हैं। भाजपा को सरकार बनाने के लिए केवल 3 वोटों की जरूरत है, जो 41 हैं। दूसरी ओर, यदि विपक्ष (कांग्रेस 21, शिवसेना उबाठा 6, वंचित बहुजन आघाड़ी 5, राकांपा शरद पवार गुट 3, एमआईएम 3, 1 निर्दलीय, महानगर विकास समिति 1 आदि) एकजुट होकर सत्ता पर कब्जा करने का फैसला करते हैं, तो उन्हें निर्दलीय और अन्य छोटे दलों का भी सहारा लेना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में, 1-2 सीटें जीतने वाले दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। महापौर पद के लिए आरक्षण की घोषणा होते ही अकोला की राजनीति में असली घटनाक्रम शुरू हो जाएगा।

जल्द ही होगी घोषणा

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर जल्द ही इस आरक्षण की घोषणा की जाएगी। इसलिए, अकोलावासियों की नजर अब आरक्षण पर है। बड़े और प्रतिष्ठित पदों के लिए जोड़ तोड़ शुरू हो गई है सत्ता का रिमोट कंट्रोल रखने वाले छोटे दलों और निर्दलीयों ने अब सीधी बातचीत शुरू कर दी है।

महापौर पद के लिए आरक्षण की घोषणा होते ही यह प्रक्रिया तेज हो जाएगी। यह बात सामने आ रही है कि कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों ने 'हम समर्थन करेंगे, लेकिन हमें महत्वपूर्ण पद चाहिए' का रुख अपनाया है। इसमें स्थायी समिति सभापति या उप महापौर पद की मांग जोर पकड़ रही है।

विधायक पठान के आवाहन से तनाव बढ़ा

कांग्रेसी विधायक साजिद खान पठान ने समान विचार धारा वाली राजनीतिक पार्टियों से आवाहन किया है कि, वे सभी एकत्रित आकर चर्चा करें, हम मनपा में सत्ता स्थापित कर सकते हैं। जानकारी के अनुसार उनके इस आवाहन के कारण सत्ताधारियों का तनाव बढ़ गया है।

उन्होंने यहां तक कहा है कि यदि विपक्ष मनपा में सत्ता स्थापित करता है तो कांग्रेस को पद की कोई लालसा नहीं है। कांग्रेस शहर का विकास विभिन्न करों में कमी, नियमित जलापूर्ति तथा साफ सफाई के साथ साथ स्वच्छ और पारदर्शी प्रशासन देने की इच्छा रखती है।

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