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अकोला जिले के औद्योगिक क्षेत्रों में केवल 40 से 45 प्रतिशत उद्योग ही चालू हैं, जबकि कई कारखाने बंद पड़े हैं।
एमआईडीसी ने उद्योग शुरू नहीं करने वाले 260 भूखंडधारकों को नोटिस जारी कर एक महीने की समयसीमा दी है।
संबंधित भूखंडधारकों को निर्धारित अवधि में उद्योग या व्यवसाय शुरू करने अथवा भूखंड वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।
Akola Industrial Development: अकोला जिले में औद्योगिक विकास को गति देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) की औद्योगिक बस्तियों में उद्योगों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जिले में शुरू किए गए उद्योगों में से वर्तमान में केवल 40 से 45 प्रतिशत उद्योग ही शुरू हैं, जबकि अनेक कारखाने बंद पड़े हैं और कई भूखंडों पर वर्षों बाद भी उद्योग शुरू नहीं हुए हैं। इस स्थिति को देखते हुए एमआईडीसी ने जिले के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के 260 भूखंडधारकों को नोटिस जारी किए हैं। संबंधित धारकों को एक महीने के भीतर उद्योग या संबंधित व्यवसाय शुरू करने अथवा भूखंड वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।
अकोला इंडस्ट्रीज एसो। सचिव नितिन बियाणी ने कहा कि उद्योगों को नियमित और पूरी क्षमता से बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से अंडरपास के माध्यम से एमआईडीसी तक संपर्क सुविधा विकसित करने की आवश्यकता है। इन बुनियादी समस्याओं का समाधान होने पर औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए इस ओर ध्यान दिया जाना जरूरी है।
अकोला औद्योगिक क्षेत्र में कुछ भूखंडों पर अब तक उद्योग शुरू नहीं हुए है। सरकार की ओर से उद्योग स्थापित करने के लिए निर्धारित समय दिया जाता है। इस अवधि में उद्योग स्थापित नहीं होने पर नियमानुसार संबंधित भूखंड वापस लेने की कार्रवाई की जाती है। ऐसी कार्रवाई समय-समय पर की जा रही है, यह जानकारी एमआईडीसी अकोला के क्षेत्रीय अधिकारी राजेंद्र जाधव ने दी।
औद्योगिक क्षेत्रों में पूंजी के अभाव के कारण अनेक कारखानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। सैकड़ों कारखाने बंद होने से हजारों कामगारों के रोजगार पर असर पड़ा है। उद्योगों को फिर से शुरू करने के लिए आर्थिक कठिनाइयों के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना आवश्यक है। ऐसा मत उद्यमी गिरीश जैन ने व्यक्त किया।
अकोला जिले में वर्ष 1975 से 1990 के दौरान औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए अकोला, अकोला विकास केंद्र, मुर्तिजापुर, अकोट, बालापुर, तेल्हारा और पातुर में औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किए गए थे। इन क्षेत्रों में औद्योगिक, व्यावसायिक और आवासीय उपयोग के लिए भूखंड आवंटित किए गए।
जिले के सात तहसीलों में अब तक कुल 2,382 भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है। इनमें से अनेक भूखंडों पर उद्योग या व्यवसाय शुरू नहीं किए गए हैं। अकोला एमआईडीसी में लगभग 589 भूखंड हैं, जिनमें से 500 से अधिक का आवंटन हो चुका है। इसके बावजूद कई भूखंड खाली हैं और अनेक कारखाने बंद पड़े हैं।