Akola Government Ambulance Service: अकोला शहर तथा जिले में सरकारी एम्बुलेंस सेवा की स्थिति बहुत ही अधिक खराब है। जिले के मुख्य जिला सर्वोपचार अस्पताल में भी एम्बुलेंस की कमी है। सिर्फ अस्पताल के कंपाउंड के अंदर ही एम्बुलेंस का उपयोग होता है। यदि किसी रोगी को किसी दूसरे शहर में स्थित अस्पताल में ले जाना हो तो उसके लिए सरकारी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। बस यही से शुरू हो जाती है निजी एम्बुलेंस सेवा की निर्भरता। आश्चर्य तो इस बात का है कि, अस्पतालों में रोगियों के लिए सर्वाधिक आवश्यक एम्बुलेंस सेवा रहती है। लेकिन सरकारी अस्पतालों में सरकारी एम्बुलेंस सेवा के हाल बेहाल होकर रह गये हैं। 108 नंबर पर कॉल करने पर भी जल्दी एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होती है।
अनेक वर्षों से सरकारी अस्पतालों में इस तरह का सिलसिला लगातार शुरू है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है। कोई इस ओर ध्यान देने वाला नहीं है। यदि सरकार द्वारा सरकारी अस्पतालों में एम्बुलेंस उपलब्ध भी करवाई जाती है तो कुछ माह या अधिक से अधिक एक, दो वर्ष में मेंटनंस के अभाव में वह एम्बुलेंस पूरी तरह से जर्जर होकर रह जाती है।
इसी तरह अधिकांश निजी एम्बुलेंस में सुविधा के अभाव के साथ साथ नियम कानून की पारदर्शिता नहीं है। आरटीओ और विविध नियमों का पालन और नियमानुसार कई एम्बुलेंस चालकों के पास समुचित कागजात उपलब्ध नहीं है। ऐसी कई एम्बुलेंस देखी जा सकती है। लेकिन यह बात सही है कि निजी एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध जरूर है और एक फोन करने पर एम्बुलेंस तुरंत रोगी की सेवा के लिए बताए गए पते पर पहुंच जाती है। यदि सरकारी एम्बुलेंस सेवा पर लोग निर्भर रहे और उनका इंतजार करे तो रोगी की हालत बिगड़ सकती है। इसलिए लोग अब आवश्यकता पड़ने पर निजी एम्बुलेंस सेवा की तरफ ही आशा से देखते हैं। कई बार निजी एम्बुलेंस सेवा का चार्ज भी अधिक लगता है लेकिन सेवा उपलब्ध हो जाती है यह बहुत बड़ी बात है।
रुग्णसेवक पार्षद पराग गवई ने कहा कि निजी एम्बुलेंस सेवा में विश्वसनीयता और पारदर्शिता की कमी है। फिर भी रोगी पूरी तरह से आवश्यकता पड़ने पर निजी एम्बुलेंस सेवा पर निर्भर होकर रह गए हैं। देखा जाए तो सभी सरकारी अस्पतालों में सरकारी एम्बुलेंस सेवा उचित दरों में उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी हमारी सरकार की है। लेकिन सरकार एम्बुलेंस सेवा इस गंभीर विषय को बिलकुल गंभीरता से नहीं ले रही है। यह हमारा दुर्भाग्य है। उन्होंने कहा कि, अकोला मनपा की भी जिम्मेदारी है कि वह रोगियों के लिए एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध करवाए तथा उचित दरों में रोगियों को एम्बुलेंस प्रदान करें।
उन्होंने बताया कि आज यह परिस्थिति है कि यदि जिला अस्पताल से किसी रोगी को किसी जांच के लिए निजी स्तर पर दूसरे अस्पताल में ले जाना हो या इलाज के लिए नागपुर, मुंबई ले जाना हो तो सरकारी एम्बुलेंस की सुविधा नहीं है। रोगी के रिश्तेदारों को निजी एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करना पड़ता है और एम्बुलेंस सेवा के दर ठहराने के बाद रोगी को ले जाना पड़ता है। सरकार का काम है कि वह रोगियों को उचित दर और पारदर्शिता के साथ सर्व सुविधा युक्त, अत्याधुनिक एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध करवाएं।