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अकोला के नए विकास प्रारूप को अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजे हुए डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है।
19 जनवरी 2024 को प्रारूप विकास योजना आधिकारिक रूप से प्रकाशित की गई थी।
नियोजन समिति ने 30 जुलाई 2024 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट नियोजन प्राधिकरण को सौंपी थी।
Akola Municipal Corporation: अकोला शहर के नियोजित विकास के लिए महत्वपूर्ण नया विकास प्रारूप (डीपी) अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजे जाने के बाद डेढ़ साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। इसका असर शहर के विकास कार्यों के साथ ही गुंठेवारी के तहत भूखंडों को नियमित करने की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। मनपा प्रशासन ऑफलाइन प्रस्ताव स्वीकार कर रहा है, लेकिन नए प्रारुप को सरकारी मंजूरी नहीं मिलने के कारण इन प्रस्तावों को मंजूर करने में कानूनी और तकनीकी अड़चनें आ रही हैं।
शहर के अनेक भूखंडधारकों के लिए पुराने विकास प्रारुप में दर्ज आरक्षण लंबे समय से परेशानी का कारण बने हुए थे। नए डीपी तैयार करते समय नियोजन इकाई ने इनमें से कई आरक्षण हटाए या उनमें बदलाव किए हैं। इससे वर्षों से आरक्षण के कारण अटकी जमीनों के मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। ऐसे भूखंडों को गुंठेवारी के तहत नियमित कराने का रास्ता भी खुलता दिखाई दे रहा है। नागरिकों को अब शहर विकास की उम्मीद जाग गई है।
प्राधिकरण ने रिपोर्ट को मंजूरी देकर प्रशासनिक प्रस्ताव पारित किया और अंतिम स्वीकृति के लिए इसे राज्य सरकार के नगर विकास विभाग के पास भेज दिया। बताया जाता है कि मंत्रालय की जांच समिति ने भी प्रारूप को हरी झंडी दे दी है। इसके बावजूद अंतिम मंजूरी और हस्ताक्षर नहीं होने से यह प्रस्ताव मंत्रालय में प्रलंबित है। नए विकास प्रारुप को मंजूरी मिलने से शहर के नियोजित विकास को गति मिलने के साथ ही पुराने आरक्षणों से प्रभावित भूखंडधारकों को भी राहत मिलने की उम्मीद है। फिलहाल मंजूरी में हो रही देरी के कारण विकास कार्यों और गुंठेवारी नियमितीकरण की प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है।
इसी उद्देश्य से मनपा प्रशासन ने ऑफलाइन प्रस्ताव स्वीकार करना शुरू किया है। लेकिन जिस नए प्रारुप के आधार पर पुराने आरक्षण हटाए गए हैं, उसे राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में कानूनी रूप से पुराना विकास प्रारुप ही प्रभावी माना जा रहा है। इस स्थिति में प्रशासन के सामने असमंजस है कि पुराने प्रारुप में दर्ज आरक्षणों को आधार मानकर नए गुंठेवारी प्रस्ताव रोक दिए जाएं या नए प्रारुप में किए गए बदलावों के अनुसार उन्हें मंजूरी दी जाए।
अकोला की प्रारूप विकास योजना 19 जनवरी 2024 को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की गई थी। इसके बाद नागरिकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए तथा नियमानुसार सुनवाई की गई। नियोजन समिति ने 30 जुलाई 2024 को अपनी विस्तृत रिपोर्ट नियोजन प्राधिकरण को सौंपी।