Illegal Abortion Case (सोर्सः एआय जनरेटेड इमेज) 
अहमदनगर

रहाता में संदिग्ध गतिविधियों पर प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में, कथित अवैध गर्भपात नेटवर्क की चर्चा तेज़

Rahata Hospital Investigation: महाराष्ट्र के राहाता शहर में कथित गैर-कानूनी गर्भपात और लिंग जांच नेटवर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इस बीच प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी चर्चा है।

आंचल लोखंडे

Rahata Gender Testing Case: राहाता के पिंपरी निर्मल गांव में सामने आए कथित लिंग जांच मामले का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि शहर में गैर-कानूनी गर्भपात (अबॉर्शन) के संदिग्ध तरीकों को लेकर चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। राज्य में लिंग जांच और भ्रूण हत्या रोकने के लिए सख्त कानून लागू होने के बावजूद, राहाता शहर में संदिग्ध गर्भपात के एक नेटवर्क के सक्रिय होने की चर्चा हो रही है।

खासकर पड़ोसी जिलों से आने-जाने वाली गाड़ियों की गतिविधियां, जो दिन-दहाड़े कुछ निजी अस्पतालों के बाहर देखी जा रही हैं, इलाके में चल रही कथित गुप्त गतिविधियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। लिंग जांच मामले की जांच अब तेज़ी से आगे बढ़ रही है और संबंधित आरोपियों से पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि इस जांच में कुछ चौंकाने वाले नाम भी सामने आ सकते हैं।

डॉ. कुटे की गिरफ्तारी

इसी जांच के दौरान डॉ. रवींद्र कुटे के अस्पताल में कथित गर्भपात किए जाने का मामला भी सामने आया। डॉ. कुटे की गिरफ्तारी के बाद अवैध गर्भपात और जेंडर डायग्नोसिस को लेकर चर्चाएं और तेज़ हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि श्रीरामपुर से राहाता तक इस तरह की गतिविधियों का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, अलग-अलग जिलों से चार पहिया वाहन सुबह से देर रात तक कुछ अस्पतालों में आते-जाते देखे जाते हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि जिन महिलाओं का इलाज उनके अपने जिले में संभव है, उन्हें इतनी दूर क्यों लाया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि कुछ महिलाओं को कथित जेंडर टेस्टिंग के बाद गर्भपात के लिए यहां लाया जा रहा हो। इस संबंध में कुछ स्थानों से कथित दस्तावेज़ और जानकारी भी सामने आने की चर्चा है।

पैसे के लिए मेडिकल एथिक्स की अनदेखी?

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, गैर-कानूनी गर्भपात के मामलों में कई बार कानून के दायरे से बाहर दवाइयों, इंजेक्शन और मेडिकल उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे मामलों में महिलाओं की जान को गंभीर खतरा भी हो सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पैसे के लालच में मेडिकल एथिक्स की अनदेखी की जा रही है और “मुझे बेटा चाहिए” जैसी मानसिकता ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है।

जांच के जरिए सच्चाई सामने लाने की मांग

गैर-कानूनी गर्भपात और भ्रूण हत्या को न सिर्फ कानून का उल्लंघन माना जाता है, बल्कि यह समाज के नैतिक पतन का भी संकेत है। यदि इन संदिग्ध गतिविधियों के पीछे की सच्चाई सामने आती है, तो इसका असर मेडिकल क्षेत्र के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। इसी वजह से स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि राहाता शहर में चल रही कथित संदिग्ध गतिविधियों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर सच्चाई जनता के सामने लाई जाए।

अधिकारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

शहर में कथित संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा के बावजूद प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और PCPNDT अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि क्या निजी अस्पतालों की नियमित जांच होती है? क्या बाहरी जिलों से आने वाले मरीजों का सही रिकॉर्ड रखा जाता है? और गर्भपात प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों की जांच कौन करता है? ऐसे कई सवाल अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

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