Maharashtra Employee Strike (सोर्सः सोशल मीडिया) 
अहमदनगर

महाराष्ट्र में 21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल, 17 लाख कर्मचारी होंगे शामिल

Government Workers Protest: महाराष्ट्र में 21 अप्रैल से 17 लाख सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे, जिससे सरकारी सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों के कामकाज पर बड़ा असर पड़ सकता है।

आंचल लोखंडे

Maharashtra Employee Strike: राज्य के सरकारी, सेमी-गवर्नमेंट कर्मचारी, शिक्षक और नॉन-टीचिंग कर्मचारियों ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर मंगलवार, 21 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। जिला राज्य सरकारी, सेमी-गवर्नमेंट कर्मचारी, प्राचार्य और शिक्षक यूनियन समन्वय समिति ने जिले और शहर के सरकारी कार्यालयों में बैठकें कर हड़ताल की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

संयोजक रावसाहेब निमसे और कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुभाष तालेकर के अनुसार, इस हड़ताल में राज्यभर के करीब 17 लाख कर्मचारी, शिक्षक और नॉन-टीचिंग कर्मचारी शामिल होंगे। संगठनों का आरोप है कि सरकार पिछले डेढ़ साल से कर्मचारियों और शिक्षकों की कई मांगों को नजरअंदाज कर रही है।

अनिश्चितकालीन हड़ताल से कई सेवाएं बाधित होंगी

संगठनों का कहना है कि केरल जैसे राज्यों में 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना उपलब्ध है, और इसी तरह की योजना महाराष्ट्र में भी लागू की जानी चाहिए। इस हड़ताल का सरकारी दफ्तरों, स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न विभागों के कामकाज पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है। इससे नागरिकों को कई सेवाओं में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

समन्वय समिति के राज्य संयोजक विश्वास काटकर ने सभी कर्मचारियों और शिक्षकों से एकजुट होकर हड़ताल में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी, “यह लंबित 18 मांगों के लिए निर्णायक लड़ाई है। यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।”

35 प्रतिशत पद खाली; कर्मचारियों पर बढ़ा दबाव

हजारों कर्मचारियों और शिक्षकों को एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन योजना के तहत 10, 20 और 30 साल बाद भी लाभ नहीं मिला है। राज्य में 35 प्रतिशत पद खाली होने के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है और पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इस हड़ताल की प्रमुख मांगों में पुरानी पेंशन योजना लागू करना, सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करना, खाली पदों को तुरंत भरना, संविदा कर्मचारियों को स्थायी करना, चतुर्थ श्रेणी और ड्राइवरों की भर्ती पर लगी रोक हटाना तथा सभी कर्मचारियों के लिए कैशलेस स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करना शामिल है।

पिछले वादे अब तक अधूरे

संगठनों के अनुसार, पिछली सरकार के दौरान किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं। वित्तीय और सेवा से जुड़े मामलों में देरी के कारण कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है। संगठनों ने यह भी कहा कि 1 मार्च 2024 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को अब तक अस्थायी पेंशन भी नहीं मिली है, क्योंकि 2024 में घोषित संशोधित राष्ट्रीय पेंशन योजना का नोटिफिकेशन अभी तक लागू नहीं किया गया है।

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