Sujay Vikhe Patil Ahilyanagar Lok Sabha (फोटो क्रेडिट-X)  
अहमदनगर

अहिल्यानगर में बढ़ेंगी लोकसभा सीटें! सुजय विखे पाटिल का बड़ा दावा- 'जिले में अब होंगे 3 सांसद'

Ahilyanagar News: सुजय विखे पाटिल का दावा, अहिल्यानगर में अब 2 नहीं बल्कि 3 लोकसभा सीटें होंगी। 2026 पुनर्गठन के बाद बदलेंगे जिले के राजनीतिक समीकरण।

अनिल सिंह

Sujay Vikhe Patil Ahilyanagar Lok Sabha: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) जिले की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। राहुरी विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के दौरान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद सुजय विखे पाटिल ने निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन (Delimitation) को लेकर एक सनसनीखेज बयान दिया है। विखे पाटिल का दावा है कि आने वाले समय में अहिल्यानगर जिले में वर्तमान की 2 सीटों के बजाय 3 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र होंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर में 2026 के बाद लोकसभा सीटों के विस्तार और पुनर्गठन की चर्चाएं जोरों पर हैं।

नए समीकरण और राहुरी उपचुनाव

सुजय विखे पाटिल वर्तमान में राहुरी विधानसभा उपचुनाव, नगर पालिका और जिला परिषद चुनावों के जरिए भविष्य की लोकसभा रणनीति का परीक्षण कर रहे हैं। वांबोरी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "पुनर्गठन के बाद अहिल्यानगर जिले की सीमाएं बदलेंगी और यहाँ तीन सांसद चुने जाएंगे।" वर्तमान में जिले में दो सीटें, अहिल्यानगर और शिरडी (आरक्षित) हैं। यदि तीसरी सीट जुड़ती है, तो जिले की सभी 12 विधानसभा सीटों का भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा।

2026 का संवैधानिक विस्तार और महाराष्ट्र

भारत के संविधान के अनुसार, लोकसभा सीटों की संख्या में वृद्धि 2026 के बाद ही संभव है। अनुमान लगाया जा रहा है कि देश भर में सांसदों की संख्या 543 से बढ़कर 848 हो सकती है। इस विस्तार में महाराष्ट्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। वर्तमान में महाराष्ट्र 48 सांसदों के साथ दूसरे स्थान पर है, लेकिन पुनर्गठन के बाद राज्य में सांसदों की संख्या बढ़कर 76 होने की संभावना है। नई दिल्ली में तैयार नया संसद भवन भी इसी बढ़ी हुई संख्या को ध्यान में रखकर बनाया गया है।

महिला आरक्षण का प्रभाव

आगामी चुनावों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण भी लागू होना तय है। सुजय विखे के अनुसार, अहिल्यानगर लोकसभा की तीन सीटों में से कौन सी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होगी, यह आने वाले समय का सबसे बड़ा राजनीतिक प्रश्न होगा। विखे पाटिल इस नए परिदृश्य में अपना राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए अभी से जिले के हर कोने में सक्रिय हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीटों की संख्या बढ़ने से विखे पाटिल परिवार जैसे प्रभावशाली राजनीतिक घरानों के लिए अपना गढ़ मजबूत करने के नए अवसर खुलेंगे।

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