महाराष्ट्र सरकार ने अग्निवीरों को सरकारी नौकरी में आरक्षण देने के फैसले पर मुहर लगाई।
150 सेलर डेकसाइड और 132 सेलर इंजनसाइड को नियुक्ति मिली।
282 पूर्व नौसैनिक अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर नियुक्त किया।
Maharashtra Agniveer Police Constable Appointment: देश सेवा का जज्बा रखने वाले युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल द्वारा अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में आरक्षण देने के लिए किए गए वादे को अब धरातल पर उतार दिया गया है। जरूरी नियमों और नीतिगत बदलावों को पूरा करने के बाद, सरकार ने राज्य के निवासी 282 पूर्व नौसैनिक अग्निवीरों को पुलिस कांस्टेबल के पद पर नियुक्त करने की औपचारिक मंजूरी दे दी है।
इस बड़े प्रशासनिक फैसले की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा कि राज्य मंत्रिमंडल ने देश की सेवा करने वाले अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने का निर्णय लिया था। उसी प्रतिबद्धता के अनुरूप आवश्यक नियमावलियों में संशोधन किया गया और अब 282 अग्निवीरों की पुलिस विभाग में नियुक्ति प्रक्रिया को पूर्ण कर लिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार से महाराष्ट्र सरकार को राज्य के मूल निवासी 282 नौसैनिक अग्निवीरों की एक आधिकारिक सूची प्राप्त हुई थी। इन सभी 282 अभ्यर्थियों को नियुक्ति के औपचारिक आदेश पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
150 सेलर डेकसाइड: इन्हें पुलिस कांस्टेबल के तौर पर सेवा में शामिल किया गया है।
132 सेलर इंजनसाइड: इन्हें भी पुलिस कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति दी गई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संदेश के अंत में सभी नव-नियुक्त पुलिस कांस्टेबलों को उनकी नई प्रशासनिक भूमिका और उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई व शुभकामनाएं दीं। राज्य सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है कि कैसे सैन्य सेवा से लौटे युवाओं के अनुभव का उपयोग नागरिक सुरक्षा में किया जा सकता है।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में 10% हॉरिजॉन्टल आरक्षण देने को फैसला किया था। वे ग्रुप C के अंतर्गत वर्दी वाली सेवाओं (यूनिफॉर्म सर्विस) के पदों पर नियुक्ति के पात्र होंगे। सशस्त्र बलों में 4 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त हुए अग्निवीरों को सरकारी सेवा में शामिल करने के लिए एक नीति बनाई गई है।