Khade Hanuman Temple Relocation Ujjain: उज्जैन में सिंहस्थ को लेकर चल रहे विकास कार्यों के बीच कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम किया जा रहा है। चौड़ीकरण की जद में आने वाले अतिक्रमण और विभिन्न धार्मिक स्थलों को प्रशासन द्वारा हटाया जा रहा है। इसी क्रम में सड़क के बीच स्थित करीब 150 वर्ष पुराने खड़े हनुमानजी के मंदिर का स्ट्रक्चर भी हटा दिया गया है। हालांकि, मंदिर में स्थापित हनुमानजी की प्रतिमा का विधिवत विस्थापन अभी नहीं किया गया है। मंदिर का स्ट्रक्चर हटने के बाद वर्तमान में प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद खड़े हनुमानजी की प्रतिमा फिलहाल टेंट में विराजमान है। यहां पुजारी द्वारा नियमित रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जल्दबाजी में नहीं की जाएगी। धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही प्रतिमा का विस्थापन किया जाएगा। इसको लेकर पुजारी और संबंधित धार्मिक संगठनों से चर्चा भी की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार प्रतिमा के विस्थापन से पहले पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर के पुजारी और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इसके बाद आपसी चर्चा और सहमति के आधार पर प्रतिमा को निर्धारित स्थान पर विधिवत स्थापित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में धार्मिक भावनाओं और परंपराओं का ध्यान रखा जाएगा।
कंठाल से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मार्ग पर आने वाले समय में श्रद्धालुओं और वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए सड़क को बेहतर और व्यवस्थित करने की योजना बनाई गई है। प्रशासन का मानना है कि सड़क चौड़ी होने से यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और लोगों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी। विकास कार्यों के दौरान रास्ते में आने वाले अतिक्रमण और निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
अपर आयुक्त नगर निगम संतोष टेगोर के मुताबिक, सड़क चौड़ीकरण का काम नियोजित तरीके से किया जा रहा है। खड़े हनुमानजी की प्रतिमा को लेकर भी प्रशासन धार्मिक पक्ष को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई करेगा। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पुजारी और धार्मिक संगठनों से चर्चा की जाएगी और उसके बाद प्रतिमा के विस्थापन की प्रक्रिया पूरी होगी। प्रशासन का दावा है कि सिंहस्थ के लिए जरूरी विकास कार्यों के साथ धार्मिक आस्था और परंपराओं का भी पूरा सम्मान रखा जाएगा।