पुलिस सेवा के साथ राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खेलों में सोनल सिसोदिया ने बनाई पहचान (सोर्स- सोशल मीडिया)
उज्जैन

खाकी वर्दी में चैंपियन का जज्बा; उज्जैन EOW इंस्पेक्टर सोनल सिसोदिया ने खेल और सेवा से पेश की अनोखी मिसाल

EOW Inspector Sports Achievement: सोनल सिसोदिया ने पुलिस सेवा के साथ खेलों में भी पहचान बनाई। डाइविंग में भारत का प्रतिनिधित्व और नेशनल रिकॉर्ड के बाद स्विमिंग में 2 रजत व 1 कांस्य पदक जीते।

अजय नीमा, सजल रघुवंशी

Sonal Sisodia Sports Achievement: उज्जैन ईओडब्ल्यू कार्यालय में पदस्थ इंस्पेक्टर सोनल सिसोदिया ने पुलिस सेवा के साथ खेल के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2012 बैच में सीधी भर्ती से सब-इंस्पेक्टर के रूप में पुलिस सेवा में शामिल हुईं सोनल हाल ही में प्रमोट होकर इंस्पेक्टर बनी हैं। खाकी वर्दी में जिम्मेदारियां निभाने के साथ वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के रूप में भी सक्रिय हैं। उनका सफर अनुशासन, मेहनत और समय प्रबंधन के जरिए अलग-अलग भूमिकाओं को संतुलित करने की मिसाल पेश करता है।

सोनल सिसोदिया को खेल और अनुशासन की प्रेरणा अपने पिता से मिली, जो स्वयं पुलिस विभाग में सेवाएं दे चुके हैं। बचपन से ही पिता की प्रेरणा और गुरु रमेश व्यास के मार्गदर्शन में उन्होंने डाइविंग का प्रशिक्षण शुरू किया। खेल के प्रति उनका जुनून ऐसा रहा कि बचपन से ही सुबह चार बजे उठकर अभ्यास करने की आदत बन गई। कठिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने डाइविंग में भारत का प्रतिनिधित्व किया और नेशनल रिकॉर्ड बनाने के साथ कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और राष्ट्रीय सम्मान भी हासिल किए।

डाइविंग के बाद स्विमिंग में भी जीते पदक

डाइविंग में अपनी पहचान बनाने के बाद सोनल ने मास्टर्स वर्ग में स्विमिंग पर ध्यान केंद्रित किया। लगातार अभ्यास और मेहनत का परिणाम उन्हें प्रतियोगिताओं में पदकों के रूप में मिला। उन्होंने स्विमिंग स्पर्धाओं में दो रजत और एक कांस्य पदक अपने नाम किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वह भारत देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। मलेशिया और चीन में आयोजित प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करने के साथ उनका खेल सफर लगातार आगे बढ़ता रहा। कॉलेज के दिनों में उन्होंने मॉडलिंग में भी अपनी किस्मत आजमाई।

ऑफिस के बाद वर्कआउट और अभ्यास पर फोकस

ईओडब्ल्यू उज्जैन में करीब एक साल से सेवाएं दे रहीं सोनल का मानना है कि पुलिस की जिम्मेदारी और खेल को साथ लेकर चलने के लिए मजबूत इच्छाशक्ति और बेहतर समय प्रबंधन जरूरी है। उनका कहना है कि कार्यालय में रहने के दौरान उनका पूरा ध्यान पुलिस की जिम्मेदारियों पर रहता है, जबकि ड्यूटी के बाद का समय वर्कआउट और खेल अभ्यास के लिए निर्धारित रहता है। वर्तमान में एरियल योगा और नियमित वर्कआउट भी उनकी दिनचर्या का हिस्सा हैं। इस तरह वह अपनी फिटनेस और खेल प्रदर्शन को लगातार बनाए रखने का प्रयास करती हैं।

परिवार का सहयोग बना सफलता की मजबूत नींव

सोनल सिसोदिया अपनी उपलब्धियों का श्रेय माता-पिता, पति और छोटे बेटे के सहयोग को देती हैं। उनका कहना है कि परिवार के प्रोत्साहन और समझ के बिना पुलिस सेवा तथा खेल दोनों को एक साथ आगे बढ़ाना आसान नहीं होता। उज्जैन पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ खेल के प्रति उनका समर्पण उन्हें लगातार नई चुनौतियों के लिए तैयार करता है। वह भविष्य में भी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर देश का प्रतिनिधित्व करने और अपने खेल सफर को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। उनका जीवन सफर उन महिलाओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण है, जो जिम्मेदारियों के साथ अपने सपनों और लक्ष्य को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं।

चार राज्यों में विधान परिषद का चुनाव, निर्वाचन आयोग ने तारीख का किया ऐलान; 23 अक्टूबर को मतदान

अवैध गिरफ्तारी पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट सख्त, लिखित आधार न बताने वाले अधिकारी के खिलाफ हो विभागीय जांच

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है SC-ST एक्ट की धारा 18-A, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल, CJI करेंगे सुनवाई

वीजा-फ्री एंट्री की सुविधा पर मलेशिया जा रहे यात्री रहे अलर्ट, भारतीय हाई कमीशन ने क्यों चेताया ?

72वें राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड के लिए सजा मंच, केवड़िया में कार्यक्रम; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी शामिल