Young Farmer Grow Sunflower: मालवा की धरती पर पारंपरिक खेती के बीच अब फसल विविधीकरण के नए प्रयोग सामने आ रहे हैं। लालपुर क्षेत्र के युवा किसान ऋषभ पंड्या और उनकी टीम ने करीब 105 बीघा जमीन पर पहली बार ऑर्गेनिक सूरजमुखी की खेती की है। खेतों में खिले पीले फूलों ने पूरे क्षेत्र का नजारा बदल दिया है। दूर से देखने पर खेत पीली चादर की तरह नजर आ रहे हैं। सूरजमुखी के खेत की खूबसूरती लोगों को आकर्षित कर रही है और कई लोग यहां पहुंचकर फोटो-वीडियो बना रहे हैं। देखते ही देखते किसान का खेत स्थानीय लोगों के लिए सेल्फी पॉइंट भी बन गया है। वहीं, आसपास के किसान भी इस नए प्रयोग को देखने और इसकी खेती की तकनीक समझने में रुचि दिखा रहे हैं।
किसान ऋषभ पंड्या के मुताबिक मालवा क्षेत्र में लंबे समय से सोयाबीन प्रमुख खरीफ फसल रही है। हालांकि मौसम और बाजार की परिस्थितियों के कारण किसानों को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में सूरजमुखी किसानों के लिए एक वैकल्पिक तिलहनी फसल के रूप में सामने आ सकता है। सूरजमुखी के बीजों से तेल तैयार किया जाता है, जिसकी बाजार में मांग बनी रहती है। किसान का कहना है कि फसल में फूल आने के साथ ही कुछ कंपनियों ने उपज खरीदने में रुचि दिखाई है। इससे खेती शुरू करने से पहले ही बाजार की संभावनाएं नजर आने लगी हैं।
सूरजमुखी तेल की मांग को लेकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी बदलाव देखने को मिला था। आयात प्रभावित होने के चलते घरेलू स्तर पर सूरजमुखी तेल की मांग और उत्पादन पर चर्चा बढ़ी। मालवा में गेहूं, सोयाबीन, चना और मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के बीच मध्य प्रदेश के किसान अब नई फसलों की संभावनाएं तलाश रहे हैं। लालपुर में किया गया यह प्रयोग इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। किसान के अनुसार सूरजमुखी की फसल लगभग 90 से 100 दिनों में तैयार हो जाती है। कम अवधि में फसल तैयार होने से किसान को अगली फसल की तैयारी के लिए भी पर्याप्त समय मिल सकता है।
लालपुर में करीब 105 बीघा में की गई ऑर्गेनिक सूरजमुखी की खेती अब उत्पादन और आमदनी के लिहाज से किसानों की उम्मीद बढ़ा रही है। किसान का कहना है कि सोयाबीन की खेती में बोवनी से लेकर फसल तैयार होने तक मौसम और बीमारी का जोखिम बना रहता था। सूरजमुखी के प्रयोग में उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। हालांकि वास्तविक मुनाफा उत्पादन, बाजार भाव, लागत और बिक्री पर निर्भर करेगा। फसल की गुणवत्ता और बाजार में कंपनियों की रुचि ने किसान का उत्साह बढ़ाया है। आसपास के किसान भी अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आने वाले समय में अपनी जमीन के कुछ हिस्से में सूरजमुखी जैसी वैकल्पिक फसलों को शामिल किया जा सकता है।
सूरजमुखी केवल तेल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके बीजों का इस्तेमाल खाद्य उद्योग में कई तरह से किया जाता है। बीजों से तैयार सनफ्लावर ऑयल घरों के अलावा खाद्य उद्योग में भी इस्तेमाल होता है। वहीं, सूरजमुखी के बीजों को भूनकर स्नैक के रूप में खाया जाता है। इन्हें सलाद, बेकरी उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों में भी शामिल किया जाता है। पैक्ड सनफ्लावर सीड्स और दूसरे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के जरिए भी बाजार तैयार किया जा सकता है। उज्जैन शहर के लालपुर में युवा किसान का यह प्रयोग फिलहाल आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और यदि उत्पादन व बाजार से जुड़े परिणाम उम्मीद के मुताबिक रहे, तो मालवा में सोयाबीन के साथ सूरजमुखी भी किसानों के लिए एक नया विकल्प बन सकता है।