रॉकी सापुरिया ट्रैक्टर यात्रा (सोर्स- सोशल मीडिया) 
उज्जैन

12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के संकल्प के साथ ट्रैक्टर से देश भ्रमण पर निकले रॉकी, पहुंचे महाकाल की नगरी उज्जैन

Rocky Sapuria Tractor Journey: हरियाणा के रॉकी सापुरिया ट्रैक्टर 'छावा' को घर बनाकर पहुंचे बाबा महाकाल के दरबार, लद्दाख और नेपाल के बाद अब ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की ओर बढ़े कदम।

सजल रघुवंशी

Unique Tractor Road Trip In India: हरियाणा के रहने वाले रॉकी सापुरिया इन दिनों अपने अनोखे देश भ्रमण को लेकर चर्चा में हैं। जहां अधिकांश लोग लंबी यात्राओं के लिए कार, बाइक या अन्य आधुनिक वाहनों का सहारा लेते हैं, वहीं रॉकी ने एक ट्रैक्टर को ही अपना चलता-फिरता घर बना लिया है। इसी अनूठी यात्रा के दौरान वे उज्जैन पहुंचे और विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उनकी यह यात्रा लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

रॉकी ने बताया कि उन्होंने 4 दिसंबर 2024 को एक ट्रैक्टर खरीदा था। इसके बाद उसे अपनी जरूरतों के अनुसार मॉडिफाई कराने में करीब दो महीने का समय लगा। ट्रैक्टर को इस तरह तैयार किया गया कि वह यात्रा के दौरान घर की तरह उपयोग में आ सके।

रॉकी ने अपने ट्रैक्टर का नाम रखा छावा

रॉकी सापुरिया ने अपने मॉडिफाइड ट्रैक्टर को छत्रपति संभाजी महाराज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए ‘छावा’ नाम दिया है। यह ट्रैक्टर उनकी देशव्यापी यात्रा का साथी बन चुका है। रॉकी के अनुसार, अब तक उनका ट्रैक्टर करीब 1180 घंटे तक विभिन्न राज्यों और दुर्गम इलाकों की सड़कों पर चल चुका है। लगातार आगे बढ़ते हुए वे नए-नए स्थलों तक पहुंच रहे हैं और अपने अनोखे सफर के जरिए लोगों को प्रेरित करने का काम भी कर रहे हैं।

लद्दाख से नेपाल तक का रोमांचक सफर

अपने इस अनूठे वाहन से रॉकी देश के कई दुर्गम और धार्मिक स्थलों की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने लद्दाख, सियाचिन ग्लेशियर, उमलिंग ला पास, स्पीति वैली, चारधाम, आदि कैलाश और ओम पर्वत जैसी चुनौतीपूर्ण यात्राएं पूरी की हैं। इतना ही नहीं, वे अपने परिवार के साथ इसी ट्रैक्टर से नेपाल भी पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध मुक्तिनाथ मंदिर के दर्शन किए। कठिन रास्तों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद उनकी यात्रा लगातार जारी है।

किसान परिवार से जुड़ाव, 12 ज्योतिर्लिंगों का लक्ष्य

रॉकी का कहना है कि वे किसान परिवार से आते हैं और ट्रैक्टर उनकी पहचान का हिस्सा है। लोगों से जुड़ने और देश को करीब से समझने के उद्देश्य से उन्होंने इस अनोखे माध्यम को चुना है। उनके ट्रैक्टर में न तो एसी है और न ही कोई लग्जरी सुविधा, फिर भी वे इसे अपने सपनों का वाहन मानते हैं।

बाबा महाकाल के दर्शन के बाद अब वे ओंकारेश्वर की ओर रवाना होंगे। उनका लक्ष्य ट्रैक्टर से देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करना है। साथ ही वे अपनी यात्रा के वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर लोगों को भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रूबरू करा रहे हैं।

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