Mahakal Temple Donation Jewellery Check: वैष्णो देवी मंदिर में चढ़ावे की करीब 20 टन चांदी के कथित रूप से नकली पाए जाने के मामले के बाद देशभर के प्रमुख मंदिरों की दान व्यवस्था चर्चा में है। इसी बीच उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में चढ़ने वाले सोने-चांदी के आभूषणों की जांच पारदर्शी और बहुस्तरीय व्यवस्था के तहत की जाती है।
महाकाल मंदिर में रोजाना देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषण अर्पित करते हैं। मंदिर प्रशासन के अनुसार, हर दान की CCTV कैमरों की निगरानी में रिकॉर्डिंग होती है और उसका पूरा विवरण कंप्यूटर व सरकारी अभिलेखों में दर्ज किया जाता है।
मंदिर समिति द्वारा अधिकृत तीन सदस्यीय सुनारों की टीम चढ़ावे में आए आभूषणों की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच करती है। सत्यापन के बाद ही दानदाता को मंदिर समिति की ओर से रसीद जारी की जाती है। आभूषणों के मूल्यांकन के दौरान कोठार प्रभारी, मंदिर कर्मचारी और डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारी की मौजूदगी अनिवार्य रहती है। जांच पूरी होने के बाद ही आभूषण मंदिर के कोषागार में सुरक्षित रखे जाते हैं।
महाकाल मंदिर की उप प्रशासक एवं कोठार प्रभारी सिम्मी यादव ने बताया कि जल्द ही मंदिर में आधुनिक मशीन लगाई जाएगी, जिससे सोने और चांदी की शुद्धता की तुरंत जांच हो सकेगी। इसके बावजूद सुनारों की विशेषज्ञ टीम भी पारंपरिक तरीके से परीक्षण जारी रखेगी।
मंदिर के अधिकृत मूल्यांकनकर्ता सुनार रवींद्र सोनी के अनुसार, कई बार श्रद्धालु अनजाने में नकली या मिलावटी आभूषण दान कर देते हैं। इसकी वजह बाजार में कुछ सराफा कारोबारियों द्वारा असली के नाम पर नकली या मिलावटी आभूषण बेचना है। ऐसे मामलों में जांच के दौरान नकली पाए गए आभूषणों को मुख्य खजाने से अलग सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है। हालांकि मंदिर प्रशासन का कहना है कि महाकाल मंदिर में बड़े पैमाने पर नकली सोना या चांदी मिलने का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है।
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प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि महाकाल मंदिर में हर चढ़ावे की CCTV निगरानी होती है और विशेषज्ञ स्वर्णकारों की मौजूदगी में जांच की जाती है। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूरी पारदर्शिता के साथ हिसाब रखा जाता है। यदि कहीं भी किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।