Singrauli Tiranga Yatra Student Health : सिंगरौली जिले के चितरंगी में तिरंगा यात्रा के दौरान तेज धूप और उमस के बीच एक दर्जन से ज्यादा छात्र-छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कई बच्चे चक्कर खाकर सड़क पर गिर पड़े, जबकि कुछ छात्राओं ने सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में बीमार छात्र-छात्राओं को चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है।
चितरंगी तहसील में आयोजित तिरंगा यात्रा में सांदीपनि विद्यालय के बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि तेज धूप, भारी उमस और लंबे समय तक पैदल चलने के दौरान अचानक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। देखते ही देखते कई छात्र-छात्राएं चक्कर खाकर सड़क पर गिर गए। कुछ छात्राओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके बाद यात्रा में मौजूद लोगों और आयोजकों में हड़कंप मच गया।
बच्चों की हालत बिगड़ते ही उन्हें तत्काल चितरंगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। यहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। सामने आए वीडियो में कुछ छात्राओं को सांस लेने में परेशानी और स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराते हुए देखा जा सकता है। फिलहाल सभी प्रभावित छात्र-छात्राओं की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
घटना के बाद तिरंगा यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के शामिल होने के बावजूद तेज धूप और उमस को देखते हुए पर्याप्त पानी एवं नाश्ते की व्यवस्था नहीं की गई थी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मेडिकल रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि तिरंगा यात्रा का नेतृत्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राधा सिंह कर रही थीं। यात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राओं के शामिल होने के कारण व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत थी। बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना सामने आने के बाद अब आयोजन की तैयारियों और चिकित्सा एवं पेयजल व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में बच्चों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। शुरुआती तौर पर तेज धूप, उमस और लंबे समय तक पैदल चलने को तबीयत बिगड़ने की वजह माना जा रहा है। हालांकि, बच्चों की स्वास्थ्य जांच और मेडिकल रिपोर्ट सामने आने के बाद ही वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। प्रशासन की ओर से मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।