Pritam Lodhi Statement: मध्य प्रदेश की राजनीति में विधायक प्रीतम लोधी एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में डॉ. आयुष जाखड़ से हुए विवाद के बाद सुर्खियों में आए लोधी ने ग्वालियर में ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में एक मुख्यमंत्री लोधी समाज से होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कल्याण सिंह को भारत रत्न देने की मांग उठाई और बताया कि वह दिल्ली तक पदयात्रा करेंगे, जिससे अपनी मांगों को जन-जन तक पहुंचाया जा सके। इसी दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने नशे में पीएचडी की है और अब वह नशा मुक्ति अभियान चलाने की बात कर रहे हैं।
विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उन्होंने नशे को करीब से समझने के लिए उसके भीतर तक जाने की कोशिश की, इसलिए वे इसे नशे में पीएचडी बताते हैं। उनका कहना है कि नशा बर्बादी की ओर ही ले जाता है और अब वे युवाओं को इसके खिलाफ जागरूक करने का अभियान चलाएंगे। हालांकि, उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने इसे गंभीर मुद्दे पर हल्के अंदाज में दिया गया बयान बताया है।
एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ के साथ विवाद के बाद लगातार सुर्खियों में बने प्रीतम लोधी ने इस बार अपने बयानों से नई बहस को जन्म दे दिया है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से एक साथ कई मुद्दे उठाए, जिसे राजनीतिक रणनीति और व्यक्तिगत छवि सुधार, दोनों के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह रही कि उन्होंने खुद को नशा विरोधी अभियान से जोड़ते हुए सामाजिक संदेश देने की भी कोशिश की, जिससे उनके बयान को अलग दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: MP News: तेज तर्रार और एकदम सटीक...भोपाल में NSG की हाई-इंटेंसिटी मॉक ड्रिल, बंसल वन में किया अभ्यास
हाल ही में प्रीतम लोधी को बयानबाजी को लेकर मध्य प्रदेश भाजपा और मुख्यमंत्री की ओर से तलब कर समझाइश दी गई थी। इससे पहले उन्होंने करैरा एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी, जिसका वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया। वीडियो वायरल होते ही आईपीएस एसोसिएशन ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। अधिकारियों का कहना था कि इस तरह की अपमानजनक भाषा लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।