संजय गांधी अस्पताल ने जिस मरीज को घोषित किया मृत, उसकी चलने लगी सांसें (सोर्स- सोशल मीडिया)
रीवा

शव ले जाने की तैयारी थी, तभी चलने लगी सांसें...रीवा के संजय गांधी अस्पताल में मचा हड़कंप; दोबारा इलाज शुरू

Patient Revived Rewa: रीवा के संजय गांधी अस्पताल में बड़ी लापरवाही, भर्ती मरीज गिरजा प्रसाद को मृत घोषित किया, परिजन शव वाहन बुक कर ले जाने लगे तभी चलीं सांसें। हड़कंप मचने पर दोबारा इलाज शुरू।

अर्पित पाण्डेय, सजल रघुवंशी

Patient Declared Dead Controversy Rewa: रीवा के संजय गांधी अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। यहां इलाज के लिए भर्ती एक मरीज को कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया गया। परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुट गए और शव को घर ले जाने के लिए वाहन भी बुक कर लिया।

इसी दौरान मरीज की सांसें चलती मिलीं, जिसके बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और उसे दोबारा इलाज के लिए शिफ्ट किया गया।

गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे थे गिरजा प्रसाद

जानकारी के मुताबिक सीधी निवासी गिरजा प्रसाद को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि वह घटना से एक दिन पहले ही इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि जांच के बाद अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद परिजन शव को घर ले जाने की तैयारी करने लगे और इसके लिए शव वाहन भी बुक कर लिया। इसी दौरान परिजनों ने मरीज का हाथ पकड़कर देखा तो उन्हें सांसें चलती हुई महसूस हुईं। इसके बाद उन्होंने तत्काल अस्पताल के कर्मचारियों और डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी। मरीज के जीवित होने की जानकारी मिलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

शव वाहन बुक करने के बाद पता चला मरीज जिंदा है

परिजनों के मुताबिक मरीज को मृत मानकर घर ले जाने की तैयारी पूरी की जा रही थी। लेकिन अंतिम समय में उसकी सांसें चलती मिलीं। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को दोबारा इलाज के लिए शिफ्ट किया। फिलहाल गिरजा प्रसाद की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। मामले ने अस्पताल में मरीजों की जांच और मृत्यु घोषित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर यह जानना जरूरी है कि मरीज को मृत घोषित करने से पहले किन चिकित्सकीय मानकों का पालन किया गया था।

प्रथम वर्ष के छात्र ने किया था परीक्षण: एचओडी

मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. पीके बघेल ने बताया कि प्रथम वर्ष के एक छात्र ने मरीज की जांच के बाद उसे मृत घोषित किया था। बाद में मरीज के जीवित होने की जानकारी सामने आई। डॉ. बघेल ने इसे बेहद दुर्लभ स्थिति बताते हुए मेडिकल साहित्य में इसे लाजरस सिंड्रोम से जोड़ा है। हालांकि, इस मामले में मरीज को किस आधार पर मृत घोषित किया गया और जांच के दौरान किस स्तर पर चूक हुई, यह स्पष्ट होना बाकी है। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

मरीज की हालत गंभीर, जांच की जरूरत

फिलहाल गिरजा प्रसाद का इलाज जारी है और उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पताल प्रबंधन ने मामले पर अभी विस्तृत आधिकारिक बयान नहीं दिया है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मरीज को मृत घोषित करने में चिकित्सकीय स्तर पर क्या गलती हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है। परिजनों की ओर से भी मामले को गंभीरता से लेने की मांग की जा रही है।

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