पवाई टोला में सड़क न होने की वजह से खाट पर शव ले जाते ग्रामीण (सोर्स- सोशल मीडिया)
रीवा

आजादी के 79 साल बाद भी पवाई टोला में सड़क का इंतजार; गर्भवती महिलाओं से लेकर शव तक खाट पर ढोने की मजबूरी

Pawai Tola Road Problem: रीवा के पवाई टोला में आजादी के 79 साल बाद भी सड़क नहीं, मरीज और प्रसूताओं को खाट पर ले जाने को मजबूर ग्रामीण, पंचायत भवन व आंगनवाड़ी होने के बावजूद पक्की सड़क का अभाव।

अर्पित पाण्डेय, सजल रघुवंशी

Pawai Tola Villagers Waiting For Road Rewa: देश आजादी के 79 वर्ष पूरे कर विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, लेकिन रीवा जिले के मनगवां विधानसभा क्षेत्र के गंगेव ब्लॉक की ग्राम पंचायत रौरा के उन्मूलन स्थित पवाई टोला के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र होने के बावजूद टोले तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं है।

सड़क के अभाव में ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है या किसी महिला को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना होता है। ऐसे समय मरीजों और गर्भवती महिलाओं को खाट या चारपाई पर रखकर मुख्य मार्ग तक ले जाने की मजबूरी बनी हुई है। किसी ग्रामीण की मृत्यु होने पर पार्थिव शरीर को भी इसी तरह मुख्य मार्ग तक पहुंचाना पड़ता है।

बारिश में और मुश्किल हो जाती है जिंदगी

बरसात के दिनों में पवाई टोला की समस्या और गंभीर हो जाती है। खराब और दुर्गम रास्ते के कारण आवागमन प्रभावित रहता है। जरूरत के समय वाहन भी टोले तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने-ले जाने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों की समस्या को लेकर समाजसेवी अमरीश पटेल ने उठाई आवाज

ग्रामीणों की समस्या को लेकर समाजसेवी अमरीश पटेल ने आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि वर्षों से ग्रामीण सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टोले में पंचायत भवन और आंगनवाड़ी केंद्र जैसी शासकीय संस्थाएं संचालित हो रही हैं, तो वहां तक सुगम पहुंच मार्ग क्यों नहीं बनाया गया।

सिर्फ सड़क निर्माण का मामला नहीं, सम्मानजनक जीवन से जुड़ा विषय

बताया जा रहा है कि यह सिर्फ सड़क निर्माण का मामला नहीं, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य, सुरक्षित आवागमन और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क निर्माण की ठोस और स्थायी कार्रवाई चाहिए। सड़क निर्माण को लेकर लोगों की चिंता जायज है, ऐसे में अब देखना यह होगा कि आखिर जिला प्रशासन अब तक गांव वालों की मांग को मानता है और उन्हें कब तक सड़क मिलती है और उनका जीवन आसान हो पाता है।

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