रीवा की 10 वर्षीय अनम अली ने 10 दिनों में 230 किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य रखा।
अनम 1 दिसंबर को रीवा से यात्रा शुरू कर 10 दिसंबर को जबलपुर पहुंचेगी।
महज ढाई साल की उम्र में मां को खोया, पिता ने मां-बाप दोनों का प्यार देकर पाला।
9 साल की उम्र में ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट हासिल कर चुकी है अनम।
वियतनाम के जॉर्ज बाकर के 21 दिनों में 230 किमी चलने के रिकॉर्ड को तोड़ने का संकल्प।
Anam Ali Rewa World Record Attempt: कहते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हौसले बुलंद हों तो मंजिल तक पहुंचने का रास्ता जरूर निकलता है। इस कहावत को हकीकत में बदलने का सपना देख रही है रीवा की 10 वर्षीय अनम अली। जिंदगी ने इस नन्हीं बच्ची से उस उम्र में मां का साया छीन लिया, जब उसे मां की ममता और आंचल की सबसे ज्यादा जरूरत थी।
महज ढाई साल की उम्र में मां को खोने वाली अनम को उसके पिता ने ही मां और बाप दोनों का प्यार देकर पाला-पोसा और उसके सपनों को उड़ान देने का हौसला दिया। अब यही बेटी अपने जज्बे और मेहनत के दम पर दुनिया में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रही है।
चौथी कक्षा में पढ़ने वाली अनम अली ने महज 10 साल की उम्र में 10 दिनों के भीतर 230 किलोमीटर पैदल चलकर विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए वह 1 दिसंबर को रीवा के सैनिक शिशु निकेतन स्कूल से अपनी यात्रा शुरू करने और 10 दिसंबर को जबलपुर शहर के आर्मी कैंट पहुंचकर इसे पूरा करने की योजना बना रही है। अनम की यह यात्रा सिर्फ एक रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, पिता के समर्पण और बड़े सपने देखने के साहस की कहानी भी है।
अनम की जिंदगी की कहानी उसके लक्ष्य से भी ज्यादा भावुक कर देने वाली है। महज ढाई साल की उम्र में उसकी मां का निधन हो गया। जिस उम्र में बच्चे मां की गोद में सुरक्षित महसूस करते हैं, उस उम्र में अनम को मां की ममता से बिछड़ने का दर्द सहना पड़ा। लेकिन उसके पिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने बेटी को मां और पिता दोनों का प्यार दिया, उसकी परवरिश की जिम्मेदारी उठाई और उसे आगे बढ़ने का हौसला दिया।
अनम अली के लिए बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले वह ताइक्वांडो में अपनी प्रतिभा और मेहनत का परिचय दे चुकी है। महज 9 साल की उम्र में ब्लैक बेल्ट हासिल करने वाली अनम के नाम ताइक्वांडो से जुड़ी गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की उपलब्धि दर्ज होने की जानकारी दी गई है। अब वह एक नई चुनौती स्वीकार कर पैदल यात्रा के जरिए इतिहास रचने की तैयारी में है।
इस बार लक्ष्य 10 दिनों में 230 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करना है। इतनी कम उम्र में लगातार कई दिनों तक लंबी दूरी तय करना आसान नहीं होगा।
अनम की इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य वियतनाम के जॉर्ज बाकर के नाम बताए जा रहे उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना है, जिसमें उन्होंने 21 दिनों में 230 किलोमीटर पैदल चलने का कारनामा किया था। अनम इसी दूरी को महज 10 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। यदि निर्धारित नियमों और आधिकारिक मानकों के अनुसार उसका प्रयास सफल होता है, तो यह उसके लिए बड़ी उपलब्धि हो सकती है। हालांकि, संबंधित रिकॉर्ड का स्रोत, श्रेणी और आधिकारिक प्रमाणन सत्यापित होना जरूरी है। अनम का संकल्प फिलहाल एक ऐसी चुनौती है, जिसमें उसे अपनी उम्र से कहीं बड़ी इच्छाशक्ति का परिचय देना होगा।
1 दिसंबर से प्रस्तावित यात्रा में अनम को 10 दिनों के भीतर 230 किलोमीटर पैदल चलने का लक्ष्य पूरा करना होगा। रीवा जिले से जबलपुर तक का यह सफर उसके लिए शारीरिक और मानसिक क्षमता की बड़ी परीक्षा होगा। इतनी कम उम्र में इस तरह की लंबी यात्रा के लिए उचित प्रशिक्षण, पर्याप्त आराम, पोषण, पानी और चिकित्सकीय निगरानी का इंतजाम बेहद जरूरी है।
अब रीवा सहित पूरे क्षेत्र की निगाहें इस नन्हीं बेटी के संकल्प पर टिकी हैं। मां की ममता से वंचित रहने के बाद पिता के प्यार और सहारे में अपने सपनों को सींचने वाली अनम क्या अपने हौसले से नया कीर्तिमान स्थापित कर पाएगी? इसका जवाब यात्रा पूरी होने और रिकॉर्ड के आधिकारिक सत्यापन के बाद सामने आएगा।