कल्पना और नवजात की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई फोटो सोर्स- सोशल मीडिया
रीवा

कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत मामले में डीन पर गिरी गाज, सुनील अग्रवाल का सतना मेडिकल कॉलेज किया गया ट्रांसफर

Rewa Medical College : रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत के मामले में डीन सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर किया गया।

अर्पित पाण्डेय, प्रीतेश जैन

Kalpana Mishra Death Case : रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में मेडिकल कॉलेज के डीन सुनील अग्रवाल पर भी कार्रवाई हुई है। सरकार ने रविवार को सुनील अग्रवाल को रीवा मेडिकल कॉलेज के डीन पद से हटा दिया। इसके साथ ही उनका तबादला सतना मेडिकल कॉलेज कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर एक और बड़ा कदम उठाया गया है।

कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया था। परिजनों ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मेडिकल कॉलेज के डीन को हटाने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था। उनका कहना था कि मौत के लिए जिम्मेदार लोगों पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।

दो डॉक्टर पहले ही हो चुके हैं निलंबित

मामले में कार्रवाई का सिलसिला पहले ही शुरू हो गया था। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर सोनल अग्रवाल और निधि पाण्डेय को निलंबित किया गया था। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक राहुल मिश्रा को भी उनके पद से हटा दिया गया। अब डीन सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर किया गया है।

चार दिन से धरने पर बैठे थे कल्पना के पिता

डीन को हटाने और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर कल्पना के पिता पिछले चार दिनों से धरने पर बैठे थे। उन्होंने आमरण अनशन भी शुरू कर दिया था। परिजनों का कहना था कि केवल निलंबन और प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। वे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

अब एफआईआर और जांच पर टिकी नजर

डीन सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना मेडिकल कॉलेज ट्रांसफर किए जाने के बाद मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, मृतका के परिजन अब भी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आगे जांच किस दिशा में बढ़ती है और कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजर है।

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