राजगढ़ का 1100 साल पुराना मां जालपा देवी मंदिर, नवरात्रि में उमड़े श्रद्धालु
भील राजाओं की कुलदेवी मानी जाती हैं मां जालपा, संत ज्वालानाथ से जुड़ी मान्यता
मनोकामना पूरी होने पर उल्टा स्वास्तिक सीधा करते हैं भक्त
विवाह में बाधा दूर करने के लिए प्रसिद्ध है मंदिर की पाती परंपरा
1100 Year Old Maa Jalpa Devi Temple In Rajgarh: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में स्थित मां जालपा देवी मंदिर शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। राजगढ़ शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर पहाड़ियों और प्राकृतिक हरियाली के बीच स्थित इस प्राचीन सिद्धपीठ में सुबह की मंगला आरती से लेकर देर रात तक भक्तों की आवाजाही बनी रहती है।
मंदिर परिसर में गूंजते माता के जयकारे, भजन-कीर्तन, नृत्य करती महिलाओं की टोलियां और जगह-जगह आयोजित भंडारे भक्तिमय माहौल बना रहे हैं। मान्यता है कि यह मंदिर करीब 1100 साल पुराना है और यहां माता के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मां जालपा देवी मंदिर का इतिहास प्राचीन जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पुराने समय में यह पहाड़ी क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था और यहां भील राजाओं का शासन हुआ करता था। उस दौर में मां जालपा को भील राजाओं की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता था। मान्यता के अनुसार, करीब ग्यारह सौ वर्ष पहले संत ज्वालानाथ ने इस टेकरी पर कठोर तपस्या की थी। उनकी साधना से प्रसन्न होकर माता यहां प्रकट हुईं।
मंदिर में स्थापित प्रतिमा को स्वयंभू यानी स्वतः प्रकट माना जाता है। शुरुआती दौर में माता एक कच्चे चबूतरे पर पीपल के पेड़ के नीचे विराजमान थीं, जो बाद में भव्य मंदिर के रूप में विकसित हुआ।
राजगढ़ जिले में स्थित मां जालपा देवी मंदिर में मन्नत मांगने की एक अनूठी परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हुए मंदिर की दीवारों पर उल्टा स्वास्तिक बनाते हैं। मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त दोबारा मंदिर पहुंचकर उसी स्वास्तिक को सीधा करते हैं। कुछ श्रद्धालु माता के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए चांदी का स्वास्तिक भी अर्पित करते हैं। यह परंपरा मंदिर की विशिष्ट धार्मिक पहचान मानी जाती है।
मंदिर की एक और खास पहचान विवाह से जुड़ी पाती परंपरा है। मान्यता के अनुसार, विवाह में बाधाओं का सामना कर रहे युवक-युवतियों के परिजन यहां पुजारियों के माध्यम से पाती निकलवाते हैं। इसे शुभ संकेत मानकर कई परिवार विवाह तय करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, कुछ मामलों में कुंडली मिलान या मुहूर्त की पारंपरिक प्रक्रिया के बिना भी पाती के आधार पर विवाह का निर्णय लिया जाता है। राजगढ़ सहित दूसरे क्षेत्रों से लोग इस परंपरा में शामिल होने पहुंचते हैं। यही अनूठी मान्यताएं मां जालपा देवी मंदिर को श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान दिलाती हैं।
रिपोर्ट- अरुण श्रीवास्तव (राजगढ़)