Morena Krishna Hospital Death Case : मुरैना के मिल एरिया रोड स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में 52 वर्षीय रामदीन कुशवाह की मौत के बाद सोमवार को हंगामा हो गया। मृतक के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर शव रखकर सड़क पर जाम लगा दिया। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे।
जारौनी नूराबाद निवासी रामदीन पुत्र देवीराम कुशवाह को उनकी 16 वर्षीय बेटी किरण बुखार की शिकायत होने पर कृष्णा अस्पताल लेकर पहुंची थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर केके गुप्ता ने रामदीन को एक टैबलेट खाने के लिए दी। टैबलेट लेने के कुछ देर बाद ही रामदीन अचेत हो गए। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें ई-रिक्शा से जिला अस्पताल भेज दिया।
मृतक की बेटी किरण का आरोप है कि कृष्णा अस्पताल में फीस की पर्ची और अन्य कागज भी उनसे वापस ले लिए गए थे। जब रामदीन को जिला अस्पताल ले जाया गया, तो वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली में रखकर वापस कृष्णा अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग करने लगे।
गुस्साए परिजनों ने कृष्णा अस्पताल के गेट के सामने शव रख दिया और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़क पर आड़ी खड़ी कर जाम लगा दिया। करीब दो घंटे तक अस्पताल के बाहर हंगामा चलता रहा। पुलिस ने अस्पताल का गेट खुलवाकर अंदर प्रवेश किया और डॉक्टर से मामले की जानकारी ली। इस दौरान डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि रामदीन का ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और वह अस्पताल में करीब 15 मिनट ही रहे थे।
डॉक्टर के मुताबिक, मरीज की हालत को देखते हुए उसे तत्काल जिला अस्पताल भेजा गया था। इधर, परिजन इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए और कार्रवाई की मांग करते रहे। करीब दो घंटे के हंगामे के बाद पुलिस ने शव को एंबुलेंस में रखकर पीएम हाउस भेज दिया। परिजनों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को मौके से हटाया और सड़क खाली कराई।
पुलिस के अनुसार रामदीन की मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस ने मामले में परिजनों के आरोपों और डॉक्टर के बयान को सामने रखते हुए जांच शुरू कर दी है। संभावित रूप से मंगलवार को शव का पीएम कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण और इलाज में लापरवाही के आरोपों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।