दिग्विजय सिंह, फोटो - सोशल मीडिया  
मध्य प्रदेश

भागीरथपुरा त्रासदी पर मध्य प्रदेश सरकार की रिपोर्टें सार्वजनिक की जानी चाहिए, दिग्विजय सिंह ने बोला हमला

Digvijaya Singh on Indore: दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इंदौर के भागीरथपुरा में पानी में मिलावट से हुई दर्जनों मौतों की जांच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश से करवाई जानी चाहिए।

अर्पित शुक्ला

Indore Water Tragedy: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में पानी में मिलावट के मामले में राज्य सरकार ने आईएएस अधिकारी को निलंबित करके मिसाल कायम की है। इसके जवाब में वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय भाजपा नेताओं के खिलाफ जिम्मेदारी तय करने में असफल रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि इंदौर के भागीरथपुरा में पानी में मिलावट से हुई दर्जनों मौतों की जांच मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश से करवाई जानी चाहिए।

सार्वजनिक सुनवाई की मांग

कांग्रेस नेता ने इस मामले में सार्वजनिक सुनवाई की भी मांग की और कहा कि राज्य सरकार की रिपोर्टें (मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय को सौंपे गए स्टेटस रिपोर्ट) भी जनता के लिए सार्वजनिक की जानी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा, “भागीरथपुरा घटना से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक होने चाहिए ताकि जिम्मेदार लोगों को पाया जा सके। मुझे विश्वास है कि मुख्यमंत्री साहस दिखाएंगे और इस मामले में न्यायिक जांच का आदेश देंगे।” उन्होंने राज्य सरकार पर आलोचना करते हुए कहा कि केवल जूनियर अधिकारियों को निलंबित करना और कुछ नगर निगम के कर्मचारियों का ट्रांसफर करना मुख्य दोषियों को बचाने का प्रयास है।

राहुल गांधी पहुंच रहे इंदौर

यह बयान उन्होंने उस दिन दिया जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार को इंदौर पहुंचकर भागीरथपुरा की प्रभावित परिवारों से मिलने वाले हैं। दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी भी राहुल गांधी के साथ इंदौर में मौजूद रहेंगे। वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने नर्मदापुरम जिले में एक कार्यक्रम में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि “राहुल गांधी मौतों पर राजनीति करने इंदौर आ रहे हैं।”

मुख्यमंत्री यादव ने कहा, “भागीरथपुरा त्रासदी में हमारी सरकार ने कड़ा कदम उठाया। हमने एक आईएएस अधिकारी को निलंबित किया, जो एक मिसाल है।” मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार को इंदौर बेंच के सामने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में 21 मृतक परिवारों को 2 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है, हालांकि सभी मौतों को चिकित्सकीय रूप से पानी में मिलावट के कारण होने की पुष्टि नहीं मिली थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को निर्धारित की है। -एजेंसी इनपुट के साथ

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