Khandwa Dog Sterilization Complaint : खंडवा कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई उस समय चर्चा का केंद्र बन गई, जब एक व्यक्ति स्वान का मुखौटा पहनकर शिकायत दर्ज कराने पहुंचा। उसके साथ नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मल्लू राठौर भी मौजूद थे। अनोखे अंदाज में पहुंची शिकायत को देखने के लिए जनसुनवाई में लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाते नजर आए।
दरअसल, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष दीपक उर्फ मल्लू राठौर ने शहर में संचालित स्वान बधियाकरण यानी नसबंदी केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नगर निगम की ओर से कुत्तों की नसबंदी के नाम पर लाखों रुपये के बिलों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। राठौर ने पूरे मामले की जांच की मांग की है।
राठौर का कहना है कि नसबंदी व्यवस्था में कथित लापरवाही के कारण शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई कुत्ते आक्रामक होकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर में आए दिन लोगों को आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में नसबंदी केंद्र की कार्यप्रणाली और नगर निगम की व्यवस्था की जांच जरूरी है।
इसी मुद्दे को अलग अंदाज में अधिकारियों के सामने रखने के लिए राठौर एक व्यक्ति को स्वान का मुखौटा पहनाकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से स्वान की ‘पीड़ा’ को आवेदन के माध्यम से अधिकारियों के सामने रखा। इस दौरान जनसुनवाई में मौजूद लोगों के बीच भी कौतूहल का माहौल बन गया। लोगों ने मौके पर मोबाइल से वीडियो बनाकर पूरे घटनाक्रम को रिकॉर्ड किया।
नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने स्वान बधियाकरण केंद्र में किए जा रहे कार्यों और उससे जुड़े भुगतान की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि कुत्तों की नसबंदी के नाम पर नगर निगम की ओर से राशि खर्च की जा रही है तो उसका असर शहर में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की है।
दीपक उर्फ मल्लू राठौर ने मामले की जांच के बाद लापरवाही या अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या सीधे तौर पर शहर की सुरक्षा और लोगों की परेशानी से जुड़ी है। ऐसे में नसबंदी अभियान को प्रभावी बनाने के साथ उसकी निगरानी और भुगतान व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, लगाए गए आरोपों पर नगर निगम या संबंधित नसबंदी केंद्र के जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।