बच्चों को 10 साल से पढ़ा रहा होमगार्ड जवान (सोर्स- नवभारत लाइव)
इंदौर

शिक्षक दिवस विशेष: पेड़ के नीचे लगती है संजय की पाठशाला, ड्यूटी से समय निकाल 10 साल से पढ़ा रहा होमगार्ड जवान

Teachers Day Special Story: इंदौर में एक होम गार्ड का जवान ड्यूटी से वक्त निकालकर लालबाग में बच्चों को शिक्षा दे रहा है, जवान ने खुद 45 से ज्यादा बच्चों का स्कूल में खुद एडमिशन करवाया है।

अंशुल मुकाती, सजल रघुवंशी

Home Guard Teaches Children Under Tree Indore: खाकी वर्दी में ड्यूटी करने वाला एक होमगार्ड जवान पिछले 10 सालों से अपने एक अलग ही मिशन में जुटा है। नाम है संजय सावरे।

इंदौर के लालबाग में रोजाना ड्यूटी के समय से वक्त निकालकर संजय बच्चों को पढ़ाते हैं। खास बात यह है कि उनकी यह पाठशाला किसी कमरे या स्कूल की बिल्डिंग में नहीं, बल्कि एक पेड़ के नीचे लगती है।

संजय के पहुंचते ही जुटने लगते हैं बच्चे

इंदौर शहर के लालबाग में अब संजय सावरे की पहचान सिर्फ एक होमगार्ड जवान के तौर पर नहीं, बल्कि बच्चों के शिक्षक के रूप में भी बन चुकी है। संजय के पहुंचते ही बच्चे धीरे-धीरे उनके आसपास इकट्ठा होने लगते हैं। देखते ही देखते पेड़ के नीचे उनकी क्लास शुरू हो जाती है। कभी जमीन पर बैठकर, कभी पेड़ की छांव में किताब-कॉपी खोलकर बच्चे पढ़ाई करते हैं। संजय उन्हें पढ़ाने के साथ अनुशासन, मेहनत और आगे बढ़ने का हौसला भी देते हैं।

10 साल से जारी है यह सिलसिला

संजय सावरे पिछले करीब 10 वर्षों से लालबाग में बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए। अब तक 45 से अधिक बच्चों का स्कूल में एडमिशन भी संजय ने खुद करवाया है। जिन बच्चों के लिए स्कूल जाना आसान नहीं था, उनके लिए संजय ने शिक्षा की राह खोलने की कोशिश की।

ड्यूटी के बाद बच्चों के लिए निकालते हैं समय

होमगार्ड की जिम्मेदारी निभाने के साथ बच्चों को पढ़ाने का यह काम संजय के लिए किसी नौकरी का हिस्सा नहीं है। यह उनकी अपनी पहल है। ड्यूटी के बीच और ड्यूटी से समय निकालकर वह बच्चों के बीच पहुंचते हैं। शायद यही वजह है कि बच्चों का भी संजय से एक अलग रिश्ता बन गया है। उनके लिए संजय सिर्फ शिक्षक नहीं, बल्कि मार्गदर्शक और प्रेरणा बन चुके हैं।

आईपीएस अफसर भी बढ़ा चुके हैं हौसला

संजय के इस काम की चर्चा एमपी पुलिस महकमे तक भी पहुंची। कई आईपीएस अधिकारी लालबाग पहुंचकर संजय की पाठशाला देख चुके हैं और उनके इस प्रयास का हौसला बढ़ा चुके हैं।अधिकारियों का बच्चों के बीच पहुंचना संजय के लिए तो प्रेरणा है ही, साथ ही बच्चों के लिए भी यह एक बड़ा सपना जगाने वाला पल होता है। जिस वर्दी को वे अपने सामने देखते हैं, उसे देखकर उनके मन में भी आगे चलकर अधिकारी बनने का जुनून पैदा होता है।

एक पेड़, कुछ बच्चे और बड़ा सपना

लालबाग का वह पेड़ अब सिर्फ एक पेड़ नहीं रह गया है। उसकी छांव में पिछले 10 वर्षों से न जाने कितने सपनों ने आकार लिया है। किसी बच्चे के हाथ में कॉपी है तो किसी के हाथ में किताब, लेकिन आंखों में भविष्य का सपना साफ दिखाई देता है। संजय सावरे की कहानी यह बताती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक पेड़ की छांव, कुछ किताबें और किसी एक इंसान की सच्ची कोशिश ही बच्चों की जिंदगी बदलने के लिए काफी होती है।

Explainer: पाकिस्तान में चुपके से तख्तापलट! आसिम मुनीर बने सबसे पॉवरफुल; क्या है पाक आर्मी चीफ की प्लानिंग?

रैलियां नहीं, मोबाइल स्क्रीन बनी माध्यम; PM Modi के जन्मदिन पर भाजपा का सेवा संकल्प अभियान

PM मोदी के उत्तराधिकारी को लेकर संजय राउत का बड़ा दावा, बोले- देवेंद्र फडणवीस बनेंगे उपप्रधानमंत्री

NALSAR Case: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास लॉ छात्रों पर कार्रवाई का अधिकार नहीं

राघव चड्ढा ने खोल दी SIR की पोल! वोटर लिस्ट से BJP सांसद का नाम कटने पर कांग्रेस ने ली चुटकी