एमपी हाईकोर्ट इंदौर खण्डपीठ (सोर्स- सोशल मीडिया) 
इंदौर

महाकाल मंदिर की सरकारी जमीन के कथित निजी हस्तांतरण पर हाईकोर्ट सख्त; राज्य शासन व कलेक्टर को नोटिस जारी

Ujjain Government Land Transfer Case: महाकाल मंदिर की सरकारी जमीन निजी हाथों में जाने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, अदालत ने उज्जैन कलेक्टर समेत शासन को भेजा नोटिस।

सजल रघुवंशी

High Court Notice To Ujjain Collector: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी शासकीय भूमि के कथित निजी हस्तांतरण का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ पहुंच गया है। मामले में दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन, राजस्व विभाग, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि महाकाल मंदिर के समीप स्थित सरकारी भूमि को बिना सक्षम आदेश के निजी नामों पर दर्ज कर दिया गया।

1950 के राजस्व रिकॉर्ड का हवाला, सरकारी जमीन पर उठे सवाल

जनहित याचिका याचिकाकर्ता राजेंद्र कुवेल की ओर से दायर की गई है। याचिका के अनुसार, महाकाल मंदिर के पास स्थित करीब 1.877 हेक्टेयर भूमि वर्ष 1950 के राजस्व रिकॉर्ड में शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। आरोप है कि बाद के वर्षों में कथित रूप से बिना वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम आदेश के इस भूमि का रिकॉर्ड बदलकर निजी व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दिया गया। याचिका में इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

हरि फाटक पार्किंग पर मंडरा सकता है असर, सिंहस्थ की तैयारियों पर भी चिंता

याचिका में दावा किया गया है कि विवादित भूमि का उपयोग वर्तमान में हरि फाटक पार्किंग के रूप में किया जा रहा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में महाकाल मंदिर आने वाले श्रद्धालु अपने वाहन खड़े करते हैं। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि यदि इस भूमि पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति दी गई तो पार्किंग व्यवस्था प्रभावित होगी। इससे भविष्य में सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ प्रबंधन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

निजी कंपनी को हस्तांतरण का दावा, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि विवादित भूमि का एक हिस्सा बाद में यूटोपिया होटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम हस्तांतरित किया गया। याचिका के अनुसार, इस कंपनी के निदेशक आलोट विधायक चिंतामन मालवीय बताए गए हैं।

हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जनहित याचिका में भूमि को पुनः शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज करने, किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाने, निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय करने की मांग की गई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है और मामले की अगली सुनवाई आगामी तिथि पर होगी।

https://youtu.be/AQTqkWeakNY?si=BXnTCcm344iguJKT

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