Indore Student Protest: नीट पेपर लीक के विरोध में प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेताओं ने रिहाई के बाद इंदौर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि उन्हें बातचीत के बहाने बुलाकर धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया गया, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। अब उन्होंने कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के इस्तेमाल की समीक्षा की मांग उठाई है।
23 जुलाई को प्रस्तावित न्याय यात्रा से पहले गिरफ्तार किए गए छह छात्र नेता जेल से रिहा होने के बाद मीडिया के सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें डीसीपी से चर्चा कराने के नाम पर बुलाया, लेकिन रास्ते में उनके मोबाइल बंद करवा दिए गए और फिर जिला अस्पताल चौकी होते हुए चंदन नगर थाने ले जाकर हिरासत में रखा गया।
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के राधे जाट का कहना है कि न्याय यात्रा की पूरी जानकारी और अनुमति का आवेदन पहले ही पुलिस को दे दिया गया था। यात्रा में करीब दस हजार लोगों के शामिल होने की संभावना भी बताई गई थी। इसके बावजूद उन्हें धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, अपशब्द कहे गए और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।
छात्र नेताओं का यह भी दावा है कि चार दिनों तक उनके परिवारों को यह तक नहीं बताया गया कि वे कहां हैं। रिहाई के बाद छात्रों ने इंदौर की कमिश्नरी व्यवस्था और धारा 151 के कथित दुरुपयोग की समीक्षा की मांग की है।
यह भी पढ़ें: सावन की तैयारी में जुटा महाकाल मंदिर, भस्म आरती का समय बढ़ेगा, अवंतिका के राजा के रूप में निकलेंगी 6 सवारियां
उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने वाले छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है। फिलहाल छात्र नेताओं के आरोपों पर इंदौर पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। पूरे मामले ने एक बार फिर धारा 151 के इस्तेमाल और छात्र आंदोलनों को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
https://youtu.be/EmTIIajKGfM?si=Pgh-KPIXnk7go3En