क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में आरोपी (फोटो सोर्स- नवभारत)
इंदौर

साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल संदिग्ध सिम उपलब्ध कराने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार, 84.58 लाख की धोखाधड़ी का खुलासा

Indore Cyber Crime News : इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल संदिग्ध सिम उपलब्ध कराने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामलों में 84.58 लाख की धोखाधड़ी सामने आई।

अंशुल मुकाती, प्रीतेश जैन

Indore Cyber Fraud Suspected SIM Network : साइबर अपराधियों तक फर्जी और संदिग्ध सिम कार्ड पहुंचाने वाले नेटवर्क के खिलाफ इंदौर क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। ऑपरेशन फास्ट-2.0 के तहत पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान चार संदिग्ध मोबाइल नंबर सामने आए, जिनसे जुड़े सिम कार्ड का इस्तेमाल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में साइबर फ्रॉड के लिए किया गया था। एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच में इन नंबरों से जुड़े मामलों में कुल 84 लाख 58 हजार 499 रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।

क्राइम ब्रांच को इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय भोपाल से संदिग्ध सिम कार्ड और पीएसओ एजेंटों की सूची प्राप्त हुई थी। इसी सूची के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध मोबाइल नंबरों और सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने पर यशवंत निवास रोड स्थित RAUT COLLECTION भी पुलिस के रडार पर आया।

दुकान संचालक की भूमिका सामने आने पर कार्रवाई

क्राइम ब्रांच ने दुकान की जांच के दौरान संचालक राजेन्द्र राऊत की भूमिका संदिग्ध पाई। जांच में दुकान से जुड़े चार ऐसे मोबाइल नंबर चिन्हित किए गए, जिनसे संबंधित सिम कार्ड दूसरे राज्यों में हुए साइबर फ्रॉड मामलों में इस्तेमाल किए गए थे। पुलिस ने नंबरों के उपयोग और सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों की जानकारी जुटाई और इसके बाद कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

राजेन्द्र राऊत समेत तीन आरोपी गिरफ्तार

जांच के आधार पर क्राइम ब्रांच ने राजेन्द्र राऊत, आनंद वासरे और सूरज सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है कि संदिग्ध सिम कार्ड किन लोगों को उपलब्ध कराए गए थे और इनके जरिए साइबर अपराधों को किस तरह अंजाम दिया गया। पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मामलों से जुड़ी सिम

क्राइम ब्रांच के मुताबिक, जांच में सामने आए चार संदिग्ध मोबाइल नंबरों से जुड़े सिम कार्ड का इस्तेमाल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज साइबर फ्रॉड के मामलों में किया गया था। एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों को खंगालने पर इन मामलों में कुल 84.58 लाख रुपये से अधिक की ठगी सामने आई। पुलिस अब इन मामलों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की भी जांच

आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस सिम उपलब्ध कराने वाले अन्य लोगों के साथ-साथ साइबर फ्रॉड नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा संदिग्ध बैंक खातों, पैसों के लेन-देन और साइबर अपराध से जुड़े अन्य वित्तीय माध्यमों की भी जांच की जा रही है। इस संबंध में महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है।

साइबर अपराध की पूरी कड़ी खंगाल रही क्राइम ब्रांच

क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि संदिग्ध सिम कार्ड किन लोगों तक पहुंचाई गईं और साइबर अपराधों में उनका इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। जांच पूरी होने के बाद साइबर फ्रॉड से जुड़े नेटवर्क की अन्य कड़ियों का खुलासा होने की संभावना है।

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