इंदौर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का अनोशा प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार का पोस्टर-पुतला रेलवे पार्सल से दिल्ली भेजा।
मालवा एक्सप्रेस के जरिए कराई गई पुलते की पार्सल बुकिंग।
पहले इंदौर पुलिस ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुतला लेकर जाने से रोका था।
पोस्टर पर लिखा है कि चलो दिल्ली और वोट चोर, गद्दी छोड़।
Indore Congress Unique Parcel Protest: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस के आंदोलन को लेकर इंदौर में अनोखा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है।
कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीर वाला पोस्टर-पुतला रेलवे पार्सल के जरिए दिल्ली रवाना किया है। इसके लिए मालवा एक्सप्रेस में बाकायदा रेलवे पार्सल की बुकिंग कराई गई है।
कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओ का कहना है इसके पहले भी जब आन्दोलन के लिए वे जा रहे थे तो पुलिस ने पुतले को ले जाने नही दिया, अब यह पुतला दिल्ली पहुचेगा जहा से कांग्रेस के कार्यकर्त्ता इसे लेकर रामलीला मैदान में जायेंगे, ताकि प्रदर्शन स्थल तक पुतले को ले जाया सके
कांग्रेस नेता विवेक खंडेलवाल ने इस पोस्टर-पुतले को रेलवे के कॉमर्शियल विभाग स्थित पार्सल गोदाम में बुक कराया गया। नेताओं ने इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी की और रेलवे से बुकिंग की रसीद भी प्राप्त की। पार्सल बॉक्स पर पोस्टर चिपकाकर उसे दिल्ली भेजने की व्यवस्था की गई, इसके लिए कांग्रेस नेताओ ने बकायदा रसीद भी कटवाई
पोस्टर-पुतले पर 'चलो दिल्ली' और 'वोट चोर, गद्दी छोड़' जैसे नारे लिखे गए हैं। कांग्रेस की ओर से इसे चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर विरोध दर्ज कराने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन से पहले कांग्रेस देश में अलग अलग तरह से विरोध दर्ज करवा कर मुद्दे कि तरफ ध्यान खीचना चाह रही है, इसलिए इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन किए जा रहे है।
दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को कांग्रेस का आंदोलन प्रस्तावित है। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए देशभर से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने की तैयारी है। इंदौर से रेलवे पार्सल के माध्यम से पोस्टर-पुतला भेजने की यह पहल अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
इस पूरे घटनाक्रम में रेलवे पार्सल की रसीद भी सामने आई है, जो पोस्टर-पुतले की बुकिंग कराए जाने की पुष्टि करती है। कांग्रेस नेताओं की इस अनोखी पहल ने दिल्ली में होने वाले आंदोलन से पहले इंदौर शहर की राजनीतिक गतिविधियों को चर्चा में ला दिया है।