एमपी हाईकोर्ट ग्वालियर खण्डपीठ (सोर्स- सोशल मीडिया)
ग्वालियर

लाड़ली बहना योजना को बंद कराने हाईकोर्ट पहुंची महिला, अदालत ने MP सरकार से मांगा जवाब; जानें पूरा मामला

Ladli Behna Yojana: लाड़ली बहना योजना को बंद कराने हाईकोर्ट पहुंची पूर्व कांग्रेस पार्षद, 1500 रुपये की राशि रोकने की मांग पर ग्वालियर खंडपीठ ने महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर मांगा जवाब।

सजल रघुवंशी

Ladli Behna Yojana Closure Petition MP: मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को बंद कराने और 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को दी जा रही ₹1500 की मासिक सहायता पर रोक लगाने की मांग को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।

ग्वालियर के थाटीपुर स्थित नेहरू कॉलोनी निवासी और वार्ड-22 की कांग्रेस की पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से यह याचिका दायर की है। इसमें मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग और वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता ने योजना को असंवैधानिक बताते हुए इसे तत्काल निरस्त करने और महिलाओं को दी जा रही नकद राशि पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है।

रोजगार और कौशल विकास को बताया स्थायी समाधान

याचिकाकर्ता सुधा दुबे का कहना है कि महिलाओं को हर महीने ₹1500 देने के बजाय उन्हें रोजगार, कौशल विकास, वोकेशनल ट्रेनिंग और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उनका तर्क है कि केवल नकद सहायता देने से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का स्थायी समाधान नहीं निकलता। उन्होंने कहा कि वह महिला कल्याण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन महिलाओं की आर्थिक क्षमता बढ़ाने के लिए रोजगार आधारित योजनाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए। याचिका में योजना को वोट की राजनीति से भी जोड़ा गया है।

योजना पर सालाना 22,500 करोड़ से ज्यादा का भार

याचिका के अनुसार, वर्तमान में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को हर महीने लाड़ली बहना योजना के तहत ₹1500 की सहायता दी जा रही है। इससे राज्य सरकार पर करीब ₹1878 करोड़ का मासिक और ₹22,500 करोड़ से अधिक का वार्षिक वित्तीय भार पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए ₹23,882 करोड़ का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता ने सरकार के कर्ज और महिलाओं की आत्मनिर्भरता के बीच योजना के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

सरकार ने लाभार्थियों को पक्षकार नहीं बनाने पर उठाई आपत्ति

सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि योजना का लाभ लेने वाली सवा करोड़ से अधिक महिलाओं को याचिका में पक्षकार नहीं बनाया गया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि शासन स्वयं लाभार्थियों की सूची अदालत में पेश करे और याचिका की प्रति लाभार्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था करे। अब महिला एवं बाल विकास विभाग को 4 सप्ताह में जवाब देना है। इसके बाद कोर्ट अंतरिम रोक की मांग समेत याचिका के अन्य बिंदुओं पर आगे सुनवाई करेगा।

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