Gwalior Digital Signature Dongle Case: ग्वालियर नगर निगम मुख्यालय के सिटी सेंटर स्थित टेंडर शाखा से प्रभारी सहायक यंत्री का डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) डोंगल गायब होने का मामला सामने आया है। जांच में निगम अधिकारियों के मुताबिक डोंगल किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि वार्ड क्रमांक 21 के भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने उठाकर अपनी जेब में रख लिया और वहां से चले गए। पूरी घटना कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है।
मामला 23 जुलाई 2026 को दोपहर करीब 2:50 बजे विद्युत विभाग की टेंडर शाखा में हुआ। घटना की जानकारी सामने आने के बाद निगमायुक्त संघप्रिय ने विश्वविद्यालय थाना पुलिस को पत्र लिखकर पार्षद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है।
शिकायत के मुताबिक, 23 जुलाई को नगर निगम मुख्यालय की टेंडर शाखा में विद्युत विभाग से जुड़े टेंडर अपलोड करने की प्रक्रिया चल रही थी। इसी काम के लिए प्रभारी सहायक यंत्री (विद्युत) रामबाबू दिनकर का डिजिटल सिग्नेचर डोंगल टेबल पर रखा हुआ था। इसी दौरान वार्ड क्रमांक 21 के भारतीय जनता पार्टी पार्षद बृजेश श्रीवास टेंडर शाखा में पहुंचे और कुछ देर वहां बैठने के बाद चले गए। उनके जाने के बाद कर्मचारियों को टेंडर अपलोड करने के लिए डोंगल की जरूरत पड़ी, लेकिन वह टेबल से गायब था। कर्मचारियों ने पूरे कार्यालय में तलाश की, लेकिन शाम तक डोंगल का पता नहीं चल सका।
डोंगल नहीं मिलने के बाद निगम कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई। निगम के मुताबिक, फुटेज में बृजेश श्रीवास टेबल पर रखा डिजिटल सिग्नेचर डोंगल उठाकर अपनी जेब में रखते और कार्यालय से बाहर जाते दिखाई दे रहे हैं। मामले में टेंडर शाखा के लिपिक बनवारी बाथम, कंप्यूटर ऑपरेटर दुष्यंत शर्मा और लवलेश श्रीवास्तव ने भी लिखित बयान दिए हैं। इन कर्मचारियों ने अपने बयानों में पार्षद द्वारा डोंगल उठाकर ले जाने की पुष्टि की है।
डिजिटल सिग्नेचर डोंगल गायब होने से टेंडर प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ-साथ उसके संभावित दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए निगम प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। निगमायुक्त संघप्रिय ने विश्वविद्यालय थाना प्रभारी को पत्र भेजकर सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों के लिखित बयानों के आधार पर पार्षद के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है। टेंडर शाखा के नोडल अधिकारी यशवंत मैकले को थाने में उपस्थित होकर एफआईआर दर्ज कराने के लिए अधिकृत किया गया है। निगमायुक्त ने कहा कि मामला गंभीर है और प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है। अब पुलिस जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई करेगी।