धार भोजशाला विवाद (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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धार भोजशाला विवाद: मुस्लिम पक्ष के पास 7 मई तक का टाइम, हाईकोर्ट ने 3 दिन में आपत्ति दर्ज कराने के दिए निर्देश

Dhar Bhojshala Case: एमपी हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी को लेकर मुस्लिम पक्ष को 3 दिनों के अंदर अपनी लिखित आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सजल रघुवंशी

Dhar Bhojshala Case Indore High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी को लेकर मुस्लिम पक्ष को तीन दिनों के भीतर अपनी लिखित आपत्तियां दाखिल करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील ने तकनीकी कारणों से वीडियोग्राफी नहीं देख पाने की बात अदालत के सामने रखी।

इस पर कोर्ट ने आईटी विभाग को तुरंत एक्सेस उपलब्ध कराने और सामग्री को वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के साथ साझा करने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, एएसआई ने स्पष्ट किया कि यह स्मारक वर्ष 1904 से उसके संरक्षण में है। एएसआई ने यह भी कहा कि 1935 में इसे ‘मस्जिद’ घोषित किए जाने के दावे को वर्तमान में कोई कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं है।

तौसीफ वारसी ने उठाया तकनीकी समस्याओं का मुद्दा

धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ है। हिंदू समुदाय इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह पूरा परिसर एएसआई के संरक्षण में है। सुनवाई के दौरान धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के वकील तौसीफ वारसी ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ के सामने तकनीकी समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि एएसआई द्वारा कराए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी तक उन्हें अब तक पहुंच नहीं मिल पाई है।

एएसआई ने अदालत में क्या बताया?

एएसआई की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार यह वीडियोग्राफी गूगल ड्राइव पर उपलब्ध कराई जा चुकी है और संबंधित पक्ष को इसका एक्सेस भी दिया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने वारसी को वीडियोग्राफी देखने की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके लिए हाईकोर्ट के आईटी विभाग को उसी दिन आवश्यक व्यवस्था करने को कहा गया, ताकि तकनीकी बाधाओं को दूर कर सुनवाई आगे बढ़ाई जा सके।

अदालत ने 7 मई तक आपत्ति दर्ज कराने के दिए निर्देश

हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी की ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद के ई-मेल पर भी वीडियोग्राफी की अतिरिक्त पहुंच उपलब्ध कराई जाए, ताकि सामग्री उन्हें जल्द साझा की जा सके। साथ ही खंडपीठ ने सोसाइटी को निर्देश दिया कि वह इस वीडियोग्राफी के आधार पर अपनी लिखित आपत्तियां 7 मई तक अदालत में दाखिल करे।

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