Narottam Mishra Political Story: मध्य प्रदेश की सियासत में कई ऐसे नेता हुए जिन्होंने अपने फैसलों से इतिहास बदला, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का अंदाज सबसे जुदा रहा। वह सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि भाजपा सरकार के लिए विधानसभा के भीतर एक ऐसी 'ढाल' रहे हैं, जिससे टकराकर विपक्ष के बड़े से बड़े हमले पस्त हो गए। आइए जानते हैं उनके राजनीतिक जीवन के वो किस्से, जो आज भी मध्य प्रदेश की संसदीय राजनीति के इतिहास में दर्ज हैं।
यह वाकया मध्य प्रदेश विधानसभा के उस दौर का है जब दिवंगत ईश्वरदास रोहाणी विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) हुआ करते थे। नरोत्तम मिश्रा की हाजिरजवाबी, तीखे तंज और विपक्षी विधायकों को अपनी बातों के जाल में उलझा लेने की कला के सब कायल थे। एक बार सदन की कार्यवाही के दौरान हल्के-फुल्के माहौल में स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने नरोत्तम मिश्रा की इसी राजनीतिक चतुराई और आकर्षण को देखते हुए उन्हें "सदन की ऐश्वर्या राय" कह दिया था। स्पीकर की इस टिप्पणी के बाद पूरा सदन ठहाकों से गूंज उठा था और यह नाम लंबे समय तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना रहा।
नरोत्तम मिश्रा के नाम मध्य प्रदेश में सबसे लंबे समय तक संसदीय कार्य मंत्री रहने का एक अटूट रिकॉर्ड दर्ज है। संसदीय कार्य मंत्री का काम सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पुल का काम करना और सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना होता है। इस चुनौतीपूर्ण पद पर इतने लंबे समय तक बने रहना यह साबित करता है कि वे न सिर्फ अपनी पार्टी बल्कि विपक्ष के नेताओं के बीच भी कितना गहरा प्रभाव रखते थे।
नरोत्तम मिश्रा के राजनीतिक जीवन का सबसे बड़ा और नाटकीय मोड़ साल 2013 में आया। विधानसभा का सत्र चल रहा था और कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार के खिलाफ 'अविश्वास प्रस्ताव' लेकर आई थी। कांग्रेस पूरी तैयारी में थी और सरकार पर दबाव था। तभी अचानक वो हुआ जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। कांग्रेस के तत्कालीन मुख्य सचेतक (Chief Whip) राकेश चतुर्वेदी अचानक खड़े हुए और उन्होंने अपनी ही पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का विरोध कर दिया।
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सदन के भीतर मचे इस घमासान के बीच, राकेश चतुर्वेदी ने चलती विधानसभा में कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव बिना चर्चा के ही गिर गया। इस पूरी 'राजनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक' के पीछे नरोत्तम मिश्रा का ही दिमाग था, जिन्होंने ऐन वक्त पर विपक्षी खेमे में ऐसी सेंधमारी की कि कांग्रेस आज तक उस झटके को भूल नहीं पाई है।
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