सोमवार को सफेद, गुरुवार को पीला...जानें नरोत्तम मिश्रा के हर दिन बदलते कपड़ों के रंगों का ज्योतिषीय रहस्य

Belief Behind Narottam Mishra Clothes: नरोत्तम मिश्रा का 'सनातन ड्रेस कोड', सोमवार से रविवार तक ग्रहों की चाल से तय होते हैं कपड़ों के रंग, माथे पर लंबा तिलक संग कड़ा आध्यात्मिक नियम।
Why Narottam Mishra wears different coloured clothes according to each day of the week
नरोत्तम मिश्रा (सोर्स- नवभारत लाइव)
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Narottam Mishra Clothing Culture Daywise: मध्य प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं जो अपने बयानों और फैसलों के लिए जाने जाते हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक ऐसे राजनेता हैं, जिनकी पहचान उनकी बेबाक बयानबाजी के साथ-साथ उनके अनूठे रहन-सहन और गहरी धार्मिक आस्था से भी जुड़ी है।

माथे पर हिंदुत्व की पहचान चमकाता लंबा तिलक, चेहरे पर चिर-परिचित मुस्कान और हर दिन के हिसाब से बदलते कपड़ों का रंग नरोत्तम मिश्रा का यह अंदाज हमेशा से ही राजनैतिक गलियारों और आम जनता के बीच कौतूहल और चर्चा का विषय रहा है।

ग्रहों की चाल और दिन के हिसाब से बदलता है कपड़ों का रंग

नरोत्तम मिश्रा को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वे ज्योतिष, ग्रहों की चाल और सनातन परंपरा में गहरा विश्वास रखते हैं। यही वजह है कि उनके कुर्ते या सदरी (जैकेट) का रंग सप्ताह के सातों दिन के हिसाब से तय होता है:

  • सोमवार: भगवान शिव और चंद्र देव का दिन होने के कारण वे अक्सर सफेद रंग के लिबास में नजर आते हैं।
  • मंगलवार: संकटमोचन हनुमान जी के प्रति आस्था प्रकट करते हुए वे लाल, केसरिया या नारंगी रंग के कपड़े पहनते हैं।
  • बुधवार: बुद्ध ग्रह और गणेश जी की आराधना के लिए इस दिन वे हरे रंग की पोशाक को प्राथमिकता देते हैं।
  • गुरुवार: भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति का दिन होने के नाते वे पीले या सुनहरे रंग के कुर्ते में दिखते हैं।
  • शुक्रवार: इस दिन वे अक्सर गुलाबी, ऑफ-व्हाइट या चमकीले रंगों का चुनाव करते हैं।
  • शनिवार और रविवार: शनिवार को शनि देव के प्रभाव को देखते हुए वे नीले या गहरे रंग और रविवार को सूर्य देव की उपासना के रूप में हल्के या तांबे जैसे (कॉपर) रंगों को तरजीह देते हैं।

माथे का तिलक: हिंदुत्व और सनातन की मुखर पहचान

डॉ नरोत्तम मिश्रा के चेहरे की सबसे बड़ी विशेषता उनके माथे पर लगा लंबा और गाढ़ा तिलक है। यह केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि उनके लिए उनकी सांस्कृतिक पहचान का गौरव है। चाहे विधानसभा का सत्र हो, कोई बड़ी चुनावी रैली हो या फिर कोई टीवी डिबेट, उनका यह तिलक हमेशा उनके माथे पर सजता है। समर्थकों के बीच यह तिलक उनके 'हिंदुत्व के फायरब्रांड नेता' होने की छवि को और मजबूत बनाता है।

माँ पीतांबरा के परम भक्त और दतिया से गहरा नाता

नरोत्तम मिश्रा के जीवन का सबसे अहम आध्यात्मिक केंद्र दतिया का प्रसिद्ध माई पीतांबरा पीठ (बगलामुखी देवी मंदिर) है। वे माँ पीतांबरा के अनन्य भक्त हैं। दतिया उनका सियासी गढ़ भी रहा है, जहाँ से वे कई बार विधायक चुने गए। कहा जाता है कि वह अपने हर बड़े काम की शुरुआत माई के आशीर्वाद से ही करते हैं। दतिया में हर साल होने वाले माई के रथ उत्सव और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में वे खुद बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। उनके इसी धार्मिक स्वभाव के कारण उनके निवास पर भी सुबह और शाम के समय विशेष पूजा-पाठ का कड़ा नियम है, जिसे वे बेहद व्यस्त दिनचर्या के बाद भी कभी नहीं छोड़ते।

राजनीति और धर्म का अनूठा संगम

कहा जाता है कि राजनीति में बने रहने के लिए जनता का साथ जितना जरूरी है, नरोत्तम मिश्रा मानते हैं कि मानसिक शांति और सही फैसलों के लिए ईश्वर की भक्ति भी उतनी ही आवश्यक है। दिन के हिसाब से कपड़े पहनने से लेकर हर वक्त धार्मिक मर्यादाओं में बंधे रहने का उनका यह स्टाइल आज मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति में एक मिसाल बन चुका।

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