मां पीतांबरा पीठ फोटो सोर्स- सोशल मीडिया
दतिया

नवरात्रि विशेष: दतिया की मां पीतांबरा पीठ, जहां तंत्र साधना के साथ जुड़ी है राष्ट्र रक्षा की मान्यता

Datia Maa Pitambara Temple : नवरात्रि में दतिया की मां पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं की कतारें लग रही हैं। शक्तिपीठ का इतिहास, तंत्र साधना का महत्व और 1962 के यज्ञ की मान्यता जानिए।

निशांत तिवारी, प्रीतेश जैन

Highlights :

  • नवरात्रि के पहले दिन से दतिया की मां पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं की कतारें।

  • तंत्र साधना और स्तम्भन की देवी के रूप में प्रसिद्ध हैं मां पीतांबरा।

  • 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान राष्ट्र रक्षा के लिए यज्ञ कराए जाने की मान्यता।

  • मंदिर परिसर में मां धूमावती, वनखंडेश्वर महादेव और हरिद्रा कुंड भी मौजूद।

  • भक्त खिड़की के माध्यम से करते हैं मां पीतांबरा के दर्शन।

Datia Maa Pitambara Peeth : नवरात्रि के पावन पर्व पर मध्य प्रदेश के दतिया स्थित विश्व प्रसिद्ध मां पीतांबरा पीठ में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ रही है। नवरात्रि के पहले दिन से ही मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की कतारें लग रही हैं। तंत्र साधना के लिए विशेष पहचान रखने वाला यह शक्तिपीठ धार्मिक आस्था के साथ अपने ऐतिहासिक प्रसंगों और परंपराओं के कारण भी देशभर में चर्चित है।

मां पीतांबरा पीठ की स्थापना से जुड़ा इतिहास काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पीठाधीश्वर श्री स्वामी जी महाराज वर्ष 1929 में दतिया आए थे। इसके बाद वर्ष 1935 में उन्होंने देवी मां पीतांबरा के विग्रह की स्थापना कराई। समय के साथ यह स्थान देशभर के श्रद्धालुओं और साधकों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया।

स्तम्भन की देवी के रूप में पूजी जाती हैं मां पीतांबरा

मां पीतांबरा को स्तम्भन की देवी और शत्रुओं का नाश करने वाली शक्ति के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें राजसत्ता की देवी भी कहा जाता है। इसी वजह से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कई राजनेता भी दतिया पहुंचकर मां के दर्शन और पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तों की मौजूदगी इस धार्मिक स्थल की व्यापक लोकप्रियता को दर्शाती है।

1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ा यज्ञ

मां पीतांबरा पीठ की पहचान से जुड़ा एक प्रमुख प्रसंग वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध का है। मान्यता के अनुसार, चीन के आक्रमण के दौरान राष्ट्र की रक्षा की कामना से श्री स्वामी जी महाराज ने मंदिर परिसर में एक बड़ा यज्ञ आयोजित कराया था। इस प्रसंग को मंदिर की परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। मंदिर परिसर में मौजूद यज्ञशाला आज भी श्रद्धालुओं के लिए इस ऐतिहासिक मान्यता की याद दिलाती है।

पीतांबरा मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़

मां धूमावती और वनखंडेश्वर महादेव के भी होते हैं दर्शन

पीतांबरा पीठ परिसर में मां पीतांबरा के साथ तंत्र साधना की देवी मां धूमावती का मंदिर भी स्थित है। इसके अलावा यहां वनखंडेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है, जिसे महाभारतकालीन और करीब पांच हजार साल पुराना बताया जाता है। इस तरह एक ही परिसर में देवी उपासना, तंत्र साधना और शिव आराधना से जुड़े धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।

हरिद्रा कुंड और खिड़की से दर्शन की परंपरा

पीतांबरा मंदिर परिसर में तंत्र साधना से जुड़ा हरिद्रा कुंड भी विशेष महत्व रखता है। यहां दर्शन की व्यवस्था भी विशिष्ट है और भक्त एक खिड़की के माध्यम से मां के दर्शन करते हैं। नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में पहुंच रहे श्रद्धालु इसी व्यवस्था के तहत मां के दर्शन कर रहे हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

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